ये कैसा कब्रिस्तान, जहां रहने के लिए हिंदू बन रहे मुस्लिम

आगरा,(उत्तर प्रदेश)। आगरा के सबसे बड़े पंचकुईंया कब्रिस्तान का निरीक्षण करने पहुंचे टीम एक मामले को लेकर हैरान हो गई गए। निरीक्षण टीम ने जब उनके दस्तावेज मांगे तो उनका माथा ठनक गया। आधार कार्ड पर नाम हिंदू धर्म से जुड़े थे, लेकिन वो अपने आप को मुस्लिम बता रहे थे। खास बात यह थी कि अधिकांश लोगों के पास उनके पहचान पत्र भी नहीं थे। जांच कर रही टीम ने कब्रिस्तान कमेटी के माध्यम से तीन दिन में सभी का ब्यौरा तलब किया है।

आगरा के पचकुईंया कब्रिस्तान में आवासीय ठिकाना बनाए जाने की सूचना पर शुक्रवार को प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। एसीएम पंचम विजय शर्मा के निर्देशन में एक कमेटी ने स्थलीय निरीक्षण किया। सुबह जब टीम निरीक्षण पर पहुंची तो उनके साथ वक्फ बोर्ड के निरीक्षक श्याम धर गुप्ता, नगर निगम और स्थानीय पुलिस भी मौजूद थी। कब्रिस्तान में कच्चे-पक्के करीब 60-70 की संख्या में आवास बने मिले। निरीक्षण टीम ने जब उनसे पूछताछ और उनके पहचान पत्र मांगे तो अधिकतर लोग अपना पहचान पत्र नहीं दिखा सके। बड़ी संख्या में लोगों ने कब्रिस्तान में अवैध कॉलोनी बना ली है।

करीब 20-25 लोगों ने अपने आधार कार्ड दिखाए जो कि बाहरी जिले के थे। इनके आधार कार्ड पर जो नाम अंकित थे वे चौंका रहे थे। आधार कार्ड पर रंजीत, राजू, अजय, निशा और इंदू आदि नाम हिंदू धर्म वाले थे और वे अपनेआप को मुस्लिम बता रहे थे। अपर नगर मजिस्ट्रेट पंचम (एसीएम) विजय शर्मा ने बताया कि कब्रिस्तान में आबादी की जांच करने के लिए टीम पहुंची थी। यहां रहने वाले लोगों के पास आगरा का कोई रिकॉर्ड नहीं है। कुछ लोगों ने आधार कार्ड दिखाए तो बड़े अजीब नाम मिले। पत्नी का नाम हिंदू और पति का नाम मुस्लिम, लेकिन वे सब अपने आप को मुस्लिम बता रहे थे। उन्होंने बताया कि सभी को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। सभी के दस्तावेजों का सत्यापन कराने के जगह खाली कराई जाएगी।

वक्फ बोर्ड के निरीक्षक श्याम धर गुप्ता का कहना है कि कब्रिस्तान में केवल कब्र खोदने वाले और कमेटी के लिए ऑफिस की व्यवस्था रहती है। इसके अलावा वहां पक्के मकान नहीं बनाए जा सकते हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी गाइडलाइन जारी की है। उन्होंने बताया कि कब्रिस्तान में पक्के मकान बने हैं। उनके मकानों में बिजली के कनेक्शन भी लगे हैं। कब्रिस्तान कमेटी ने मकान बनाने वालों के बैनामे व अन्य स्वामित्व वाले अभिलेख मांगे गए हैं। इसके लिए तीन दिन का समय दिया गया है। अगर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए तो ध्वस्तीकरण किया जाएगा। इसके अलावा अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जा सकती है।

कब्रिस्तान में रहने वाले लोगों के सत्यापान के लिए चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने जिलाधिकारी और एसएसपी को अवगत कराया था। उन्होंने कब्रिस्तान संचालित स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे को कब्रों पर खेलते-कूदते देखे थे। नरेश पारस का कहना है कि कब्रिस्तान में रहने वाले बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। मुख्य धारा से बच्चे भटक रहे हैं। इससे भिक्षावृत्ति को भी बढ़ावा मिलता है।

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