कबाड़ के जुगाड़ से चीनी खिलौना उद्योग को मात देने की तैयारी में इंदौर

इंदौर,(मध्य प्रदेश)। बीते दिनों एक खबर आई थी कि खिलौनों के मामले में भी मेक इन इंडिया चमक रहा है। खिलौनों का आयात कम हुआ है। देश में अधिक खिलौने बनने लगे हैं। अब इसे गति देने के लिए इंदौर आगे आया है। स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार नवाचार करने वाला इंदौर अनुपयोगी वस्तुओं से खिलौने बनाकर चीनी खिलौनों पर निर्भरता कम करने की योजना पर काम कर रहा है। शहर में अनुपयोगी वस्तुओं से दो फोर आर गार्डन (रिसाइकल, रिड्यूस, रियूज, रिकवर) बनाए हैं। इसमें प्लास्टिक की बोतलों से म्यूरल, टायर, लकड़ी और लोहे का इस्तेमाल कर बच्चों के लिए झूले और पाथ वे बनाए हैं।

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शहर के युवाओं और व्यापारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

चौराहों पर अनुपयोगी वस्तुओं से बनी कलाकृतियां लगाई गई हैं। अब निगम अनुपयोगी वस्तुओं से खिलौने बनाने के लिए युवाओं और खिलौना कारोबारियों को प्रशिक्षण देगा। इंडियन स्वच्छता लीग के तहत विद्यार्थियों, स्व सहायता समूह व खिलौना निर्माताओं को देश भर में 26 सितंबर से ‘पुट वेस्ट टू प्ले” थीम पर आयोजित ‘स्वच्छ टायकाथान” प्रतियोगिता के लिए तैयार किया जाएगा। इसके प्रशिक्षण के लिए शिविर लगाए जाएंगे। आम लोग अपने अनुपयोगी सामान का इस्तेमाल कर ये खिलौने तैयार करेंगे। उल्लेखनीय है कि अकेले इंदौर में खिलौनों का कारोबार सालाना 200 करोड़ रुपये से अधिक का है। यहां सिर्फ तीन ही उद्योग हैं जो खिलौना निर्माण करते हैं।

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अनुपयोगी वस्तुओं से खिलौने तैयार करने के नवाचार में जुटा इंदौर अगले तीन माह में स्कूल-कालेज के विद्यार्थियों के साथ ही जरूरतमंत लोगों को इसके लिए प्रशिक्षित करेगा। इसके बाद यहां तैयार होने वाले खिलौनों को बाजार भी उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर देश के अन्य शहरों को भी अनुपयोगी वस्तुओं से खिलौने तैयार करने का प्रशिक्षण देगा।

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स्वच्छता सर्वेक्षण में अंक भी दिलवाएंगी ये गतिविधियां

आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण की थीम ‘वेस्ट टू वेल्थ” है। ऐेसे में फोर आर सिद्धांत को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां पर जोर रहेगा। सर्वे में टूलकिट के अनुसार 30 सितंबर तक नगरीय निकायों को फोर आर के सिद्धांतों का पालन करते हुए स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना है। इसके लिए आगामी सर्वे में 50 अंक मिलेंगे। इसके अलावा वेस्ट टू वंडरपार्क भी तैयार किए जाने हैं। इसमें भी 100 अंक मिलना है। यही वजह है कि निगम शहर में ज्यादा से ज्यादा युवाओं व लोगों को ‘स्वच्छ टायकाथान” में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा।

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चिड़ियाघर में अनुपयोगी टायरों से बनाई कुर्सियां व झूले

वेस्ट टू यूज थीम के तहत इंदौर नगर निगम ने कालेज के छात्रों के माध्यम से मेघदूत गार्डन में अनुपयोगी चीजों से गुड़िया बनाकर प्रदर्शित किया था। इसके अलावा चिड़ियाघर में निगम की वर्कशाप में उपलब्ध कबाड़ से रेलिंग बनाई गई। स्ट्रीट लाइट के अनुपयोगी पोल से केनोपी, टायरों से कुर्सी टेबल, झूले तैयार किए गए हैं। चिड़ियाघर के वन्य जीवों के खेलने के लिए भी संसाधन तैयार किए गए हैं। अनुपयोगी चीजों से खिलौने तैयार करने के लिए शिविर भी आयोजित किए जाएंंगे। स्थानीय खिलौना उद्योग के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे। इस तरह अनुपयोगी वस्तुओं का इस्तेमाल होने के साथ रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे। फिलहाल खिलौना उद्योग चीन सहित अन्य देशों पर निर्भर है। अब स्थानीय स्तर पर खिलौने तैयार कर चीन के बाजार पर निर्भरता कम करेगा। नगर निगम द्वारा जल्द ही शहर के खिलौना उद्योगों के साथ बैठक की जाएगी। इसमें चीन से आने वाले खिलौनों के मुकाबले स्थानीय खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। स्कूल व कालेजों में भी अनुपयोगी चीजों से खिलौना बनाने के प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। इसकी शुरुआत 17 सितंबर को गांधी हाल में लगने वाले ‘विकल्प मेले से होगी। इसमें अनुपयोगी वस्तुओं से खिलौने निर्माण की लाइव कार्यशाला होगी। इसमें लोग सीख सकेंगे कि अनुपयोगी चीजों का उपयोग कैसे किया जा सकता है।

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