लद्दाख में न्याय की नई राह, लेह में उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ का सीजेआई सूर्यकांत ने किया उद्घाटन; सैनिकों से किया वादा निभाया
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को बड़ी सौगात दी है। रविवार को उन्हेंने लेह में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की स्थायी बेंच का शुभारंभ किया। लेह में हाईकोर्ट की बेंच के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और स्थानीय दल मांग करते रहे हैं। पिछली बार जब सूर्यकांत लेह गए थे तब उन्होंंने सैनिकों से वादा किया था कि कानून उन तक पहुंचेगा।

लेह,एजेंसी। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लोगों को न्याय तक आसान पहुंच दिलाने की दिशा में रविवार, 18 अक्टूबर को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने लेह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की लद्दाख पीठ का उद्घाटन किया। इस पीठ के शुरू होने से दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों, वकीलों और मुकदमेबाजों को उच्च न्यायालय से जुड़े मामलों के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। पीठ में नियमित सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होगी।
उद्घाटन समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लद्दाख से जुड़े मामलों की सुनवाई को अधिक सुलभ बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी विशेष व्यवस्था करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध होने पर लद्दाख से संबंधित मामलों को सुप्रीम कोर्ट में एक ही दिन सूचीबद्ध कर उनकी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। इससे लेह और कारगिल के वकील लद्दाख से ही अपनी दलीलें रख सकेंगे और पक्षकारों को दिल्ली तक यात्रा करने में लगने वाले समय तथा खर्च से राहत मिल सकेगी।
मुख्य न्यायाधीश का यह कदम लद्दाख के सैनिकों से किए गए उनके उस वादे से भी जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के लिए न्याय तक पहुंच आसान होनी चाहिए। मार्च 2026 में लेह यात्रा के दौरान उन्होंने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा था कि जब जवान देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं, तो देश का दायित्व है कि उनके और उनके परिवारों के लिए न्याय व्यवस्था तक पहुंच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सैनिकों और उनके परिजनों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम रास्तों, खराब मौसम और लंबी दूरी के कारण स्थानीय लोगों को न्यायिक संस्थानों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेह और कारगिल के राजनीतिक तथा सामाजिक संगठनों ने इस समस्या को दूर करने के लिए लगातार मांग उठाई थी। सोनम वांगचुक सहित कई स्थानीय नेताओं और संगठनों ने भी लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने को मंजूरी दी थी। इसके बाद 27 अगस्त को इससे संबंधित विनियमन अधिसूचित किया गया और 5 सितंबर से यह प्रभावी हुआ। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर को लेह को पीठ की बैठक के लिए निर्धारित किया। इससे पहले उच्च न्यायालय की पीठें जम्मू और श्रीनगर में थीं।
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने इस पहल को क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि नई पीठ से दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को न्यायिक सेवाएं नजदीक उपलब्ध होंगी। उद्घाटन समारोह में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों तथा भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
लेह में उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ की स्थापना को लद्दाख में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय वकीलों और पक्षकारों को सुविधा मिलेगी, बल्कि न्याय व्यवस्था को क्षेत्र की भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सुलभ बनाने में भी मदद मिलेगी।




