चीन ने सुरंग खोदने वाली मशीनों के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध, भारत की मेट्रो और रेल परियोजनाओं पर बढ़ सकती है चिंता
चीन ने ऐलान किया है कि वह सुंरग खोदने वाली मशीनों (टनल बोरिंग मशीनों) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रहा है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि यह प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को देखते हुए लगाया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर भारत की परियोजनाओं पर पड़ सकता है।

बीजिंग,एजेंसी। चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने रणनीतिक हितों का हवाला देते हुए सुरंग खोदने वाली मशीनों और उनसे संबंधित उपकरणों के निर्यात पर नियंत्रण लागू करने की घोषणा की है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, ये प्रतिबंध 18 अक्टूबर से प्रभावी हो गए हैं। इस फैसले से भारत की उन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिनमें सुरंग निर्माण के लिए चीनी मशीनों और उनके पुर्जों का इस्तेमाल किया जाता है।
चीन दुनिया के कई देशों को टनल बोरिंग मशीनों और उनसे जुड़े उपकरणों की आपूर्ति करता है। इन मशीनों का इस्तेमाल मेट्रो रेल नेटवर्क, रेलवे कॉरिडोर और बड़ी सुरंग परियोजनाओं के निर्माण में किया जाता है। भारत भी लंबे समय से चीनी मशीनों का खरीदार रहा है। ऐसे में निर्यात पर नए नियंत्रण लागू होने से मशीनों की उपलब्धता, आपूर्ति और परियोजनाओं की समयसीमा को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले उपकरणों में नागरिक और सैन्य, दोनों तरह के इस्तेमाल की क्षमता है। मंत्रालय के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा करना तथा परमाणु अप्रसार से जुड़े दायित्वों सहित अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करना है। चीन ने कुछ विशेष प्रकार के ड्रेजर और उनसे संबंधित उपकरणों के निर्यात नियंत्रण नियमों में संशोधन की भी जानकारी दी है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब चीन उन्नत तकनीकों से जुड़े निर्यात नियंत्रण उपायों का विस्तार कर रहा है। इनमें उन्नत सौर विनिर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित कुछ तकनीकों सहित कई क्षेत्रों को लेकर नियंत्रण बढ़ाने की योजनाएं भी चर्चा में रही हैं। चीन का कहना है कि संबंधित देशों और क्षेत्रों को उसके निर्यात नियंत्रण संवाद तंत्र के माध्यम से इन उपायों की जानकारी दी गई है।
भारत को पिछले कुछ वर्षों में चीन में निर्मित टनल बोरिंग मशीनों की खरीद में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। तीसरे देशों में असेंबल की गई चीनी मशीनों की खरीद भी भारत के लिए एक विकल्प रही है। वर्ष 2024 में तत्कालीन जर्मन उपकुलपति रॉबर्ट हाबेक के साथ बातचीत के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस मुद्दे को उठाया था। गोयल ने आरोप लगाया था कि चीन एक जर्मन कंपनी द्वारा निर्मित टनल बोरिंग मशीनों के निर्यात में बाधा डाल रहा है।
टनल बोरिंग मशीनें आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं। इनके जरिए जमीन के भीतर लंबी सुरंगों का निर्माण किया जाता है, जिससे शहरी मेट्रो, रेल संपर्क और अन्य परिवहन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। यदि इन मशीनों या उनके आवश्यक पुर्जों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो संबंधित परियोजनाओं की लागत और निर्माण कार्यक्रम पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, चीन के नए निर्यात नियंत्रणों का भारत की परियोजनाओं पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किन मशीनों और उपकरणों को प्रतिबंधों के दायरे में रखा गया है तथा उनके निर्यात के लिए क्या शर्तें लागू होंगी। भारत के लिए वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की उपलब्धता और घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाना भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है।




