एंटीलिया विस्फोटक मामले में नया मोड़, परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की मांग पर अदालत में बहस

बॉम्बे हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस अपील पर सुनवाई पूरी कर ली, जो बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई जमानत के खिलाफ दायर की गई थी। कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

मुंबई,एजेंसी। एंटीलिया विस्फोटक मामले में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की मांग को लेकर कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। सेवानिवृत्त सहायक पुलिस आयुक्त भीमराज रोहिदास घाडगे की ओर से दायर याचिका पर शनिवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत में करीब एक घंटे तक बहस हुई। याचिकाकर्ता के वकील निलेश ओझा ने परमबीर सिंह की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे पर सवाल उठाते हुए उन पर न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और अदालत को गुमराह करने के आरोप लगाए।
ओझा के अनुसार, परमबीर सिंह ने हस्तक्षेप याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें कथित तौर पर दो गंभीर गलतियां और भ्रामक बयान शामिल हैं। उन्होंने अदालत में दलील दी कि इस मामले में न्यायिक जांच की प्रक्रिया के दौरान हलफनामा दाखिल करने की आवश्यकता और उसके कानूनी औचित्य पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340, जिसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में संबंधित प्रावधान के रूप में धारा 379 से जोड़ा गया है, का हवाला देते हुए अपनी आपत्तियां रखीं।
वकील निलेश ओझा ने दावा किया कि परमबीर सिंह ने अदालत की मांग के बिना जवाबी हलफनामा दाखिल कर स्थापित कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन किया है। उन्होंने इस मामले में परमबीर सिंह और उनके वकील के खिलाफ अवमानना संबंधी संदर्भ बंबई उच्च न्यायालय को भेजे जाने की मांग भी उठाई। हालांकि, ये सभी याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलें और आरोप हैं। इन पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
ओझा ने परमबीर सिंह पर एंटीलिया मामले से जुड़े कथित षड्यंत्र में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सचिन वाजे की भूमिका को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को हलफनामा सौंपा गया है। वकील ने सवाल उठाया कि किसी अधीनस्थ अधिकारी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी या अनुमति के बिना इतने महत्वपूर्ण कदम उठाना कैसे संभव था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परमबीर सिंह ने सचिन वाजे को दोबारा पुलिस सेवा में लाने और अपराध खुफिया इकाई का प्रमुख बनाने में भूमिका निभाई थी।
ओझा ने अपने वक्तव्य में दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामलों की जांच तथा पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन घटनाओं के संदर्भ में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। हालांकि, इन अलग-अलग मामलों के बीच किसी आपराधिक साजिश या साझा भूमिका का निष्कर्ष अदालत अथवा जांच एजेंसियों की पुष्टि के बिना नहीं निकाला जा सकता।
एंटीलिया विस्फोटक मामले में परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की मांग और उनके हलफनामे को लेकर उठाए गए सवालों पर अब अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले में आरोपों की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कानूनी आपत्तियों पर अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट होगी।

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