डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसी दिल्ली की महिला को महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने बचाया, 27 लाख गंवाने के बाद बची बाकी जमा पूंजी
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए बुजुर्ग महिला को बचाया है। मामले में दिल्ली की एक बुजुर्ग महिला को समय रहते बचा लिया गया, जो उसी गिरोह के जाल में फंस चुकी थी और 27 लाख रुपए गंवा चुकी थी।

मुंबई,एजेंसी। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने का नया तरीका अपनाया है। इसी तरह की ठगी का शिकार हो रही दिल्ली की 74 वर्षीय महिला को महाराष्ट्र साइबर की तकनीकी जांच और दिल्ली पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप से बचा लिया गया। महिला कथित तौर पर साइबर ठगों को करीब 27 लाख रुपये पहले ही ट्रांसफर कर चुकी थी। समय रहते पुलिस को जानकारी मिलने से उसकी बाकी जमा पूंजी ठगों के हाथों में जाने से बच गई।
महाराष्ट्र साइबर के मुताबिक, यह मामला छत्रपति संभाजीनगर की एक 74 वर्षीय महिला से करीब तीन करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी की जांच के दौरान सामने आया। महाराष्ट्र साइबर की टीम स्थानीय पुलिस को ठगी की रकम के लेनदेन और संबंधित बैंक खातों की पड़ताल में तकनीकी सहायता दे रही थी। इसी जांच के दौरान एक ऐसे बैंक खाते का पता चला, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आए एक संदिग्ध खाते में करीब 89 लाख रुपये का लेनदेन हुआ था। इसी खाते में यूको बैंक के माध्यम से एक अन्य व्यक्ति की ओर से 14 लाख रुपये का नया आरटीजीएस लेनदेन भी मिला। महाराष्ट्र साइबर की तकनीकी टीम ने इस लेनदेन की पड़ताल शुरू की और बैंक से संबंधित खाताधारक की पहचान संबंधी जानकारी मांगी।
बैंक से प्राप्त ग्राहक पहचान संबंधी दस्तावेजों से पता चला कि रकम भेजने वाली महिला दिल्ली की निवासी है। जांच में आशंका सामने आई कि महिला भी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगों के जाल में फंसी हुई है। इसके बाद महाराष्ट्र साइबर ने 13 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस को सतर्क किया।
सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने महिला का पता लगाया और उसे कथित साइबर ठगी के जाल से बाहर निकाला। महिला पहले ही करीब 27 लाख रुपये गंवा चुकी थी, लेकिन पुलिस की समय पर कार्रवाई से उसकी शेष जमा पूंजी बचाने में मदद मिली। इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
महाराष्ट्र साइबर ने नागरिकों से अपील की है कि वे डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आने वाली कॉल से सावधान रहें। कोई भी वास्तविक पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पैसे जमा कराने की मांग करती है। ऐसी कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और मामले की सूचना पुलिस को दें।




