कैदियों को घर ले जाने वाली जेलर अब खुद जेल में, पद के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार

अजमेर सेंट्रल जेल की पूर्व जेलर दिव्या चौधरी को पद के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार कर उसी जेल में कैदी के रूप में भेज दिया गया है। उन पर हत्या की सजा काट रही दो महिला बंदियों से घर पर जबरन काम कराने, धमकी देने और फरार रहने का आरोप है।

अजमेर,राजस्थान। अजमेर सेंट्रल जेल की पूर्व जेलर दिव्या चौधरी को पद के कथित दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत के आदेश के बाद उन्हें उसी अजमेर सेंट्रल जेल भेज दिया गया, जहां कभी वह जेल प्रशासन की कमान संभालती थीं। पुलिस के अनुसार, उन पर दो महिला कैदियों को बिना वैध अनुमति जेल से बाहर ले जाकर अपने निजी आवास पर घरेलू काम कराने का आरोप है।
अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाला के अनुसार, दोनों महिला बंदी हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रही थीं। पुलिस जांच में आरोप है कि तत्कालीन जेलर उन्हें अपनी निजी कार से जेल से बाहर ले जाती थीं। इस दौरान मुख्य द्वार पर होने वाली निर्धारित गेट एंट्री भी दर्ज नहीं कराई गई। ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षाकर्मियों ने जब बिना वैध दस्तावेज कैदियों को बाहर ले जाने पर आपत्ति जताई तो कथित तौर पर उन्हें कार्रवाई और नौकरी से हटवाने की धमकी दी गई।
मामले का खुलासा जुलाई में जेल के एक गार्ड की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस के मुताबिक, सरकारी स्तर पर अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद 5 अगस्त को दिव्या चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद प्रशासन ने दिव्या चौधरी और उनकी सहयोगी जेल गार्ड सोनिया चौधरी को निलंबित कर मुख्यालय बीकानेर सेंट्रल जेल से संबद्ध कर दिया था।
पुलिस का कहना है कि दोनों ने संबंधित मुख्यालय में रिपोर्ट नहीं की और फरार हो गईं। बाद में पुलिस ने दिव्या चौधरी के अजमेर स्थित आवास पर कार्रवाई कर दोनों महिला बंदियों को बरामद किया और उन्हें वापस जेल भेजा। पुलिस के अनुसार, करीब दो महीने तक तलाश के बाद दिव्या चौधरी कोटा स्थित एक फ्लैट से गिरफ्तार की गईं।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अदालत के आदेश के बाद पूर्व जेलर को अजमेर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। मामले में आरोपी जेल गार्ड सोनिया चौधरी अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताई जा रही हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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