पहले प्रयास में असफलता, दूसरी कोशिश में सफलता, बागपत की दो बेटियां सेना में लेफ्टिनेंट बनीं, ब्राह्मण समाज ने किया सम्मान
यूपी के बागपत जिले की दो बेटियों का सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयन हुआ है। दोनों को पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली। दूसरे प्रयास में दोनों लेफ्टिनेंट बन गईं।

बागपत,उत्तर प्रदेश। जिले की दो बेटियों कशिश शर्मा और अवि शर्मा ने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। बड़ौत की कशिश शर्मा और खेकड़ा की अवि शर्मा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में सफलता हासिल कर सेना की चिकित्सा सेवा से जुड़ने का अवसर प्राप्त किया है। कशिश बीएमएस और अवि एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगी।
बड़ौत निवासी कशिश शर्मा ने वर्ष 2024 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद घर पर रहकर नीट की तैयारी शुरू की। करीब दो वर्षों तक उन्होंने प्रतिदिन 17 से 18 घंटे पढ़ाई की। पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परिवार के प्रोत्साहन के बाद उन्होंने दोबारा तैयारी की और करीब 60 हजार रैंक के साथ नीट में सफलता हासिल की। कशिश का कहना है कि पहली असफलता से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने इसे अपनी तैयारी को और बेहतर करने का अवसर माना।
खेकड़ा की अवि शर्मा ने भी नीट में सफलता के लिए दो प्रयास किए। पहले प्रयास में उन्होंने घर पर रहकर तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में कोचिंग लेकर अपनी तैयारी को मजबूत किया और दूसरी कोशिश में परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। अवि के अनुसार, वह बचपन से ही सेना की वर्दी से प्रभावित रही हैं और अब चिकित्सा सेवा के माध्यम से देश की सेवा करना उनका लक्ष्य है।
कशिश के पिता सुबोध शर्मा ने बताया कि उन्होंने बेटी को पढ़ाई के लिए पूरी स्वतंत्रता दी और उसके फैसलों में हमेशा साथ दिया। वहीं, अवि के पिता सुधीर शर्मा, जो पेशे से लैब टेक्नीशियन हैं, ने भी बेटी की पढ़ाई और तैयारी में पूरा सहयोग किया। दोनों परिवारों ने बेटियों की सफलता को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।
दोनों बेटियों की सफलता से बड़ौत और खेकड़ा में खुशी का माहौल है। समाज के लोगों ने उनके घर पहुंचकर बधाई दी। खाप चौधरी और समाज के वरिष्ठ लोगों ने दोनों बेटियों को पटका पहनाकर तथा भगवान परशुराम का चित्र भेंट कर सम्मानित किया। 84 देश खाप ब्राह्मण समाज के पं. सुभाष शर्मा ने कहा कि दोनों बेटियों ने यह साबित किया है कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। चौधरी ओंकार शर्मा ने कहा कि उनकी उपलब्धि समाज में बेटियों को शिक्षा और करियर के लिए आगे बढ़ाने की सोच को और मजबूत करेगी।




