भदोही जिला अस्पताल के गेट पर प्रसव मामले में डॉक्टर की सेवा समाप्त, सीएमएस समेत पांच पर कार्रवाई

भदोही के महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल के गेट के बाहर प्रसव पीड़ा से परेशान महिला ने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए इमरजेंसी में तैनात संविदा डॉक्टर की सेवा समाप्त कर दी।

भदोही,उत्तर प्रदेश। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाले प्रसव मामले में जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। प्रसव पीड़ा से परेशान एक महिला को अस्पताल में भर्ती न किए जाने के आरोप के बाद उसे अस्पताल के गेट के बाहर सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया और स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की। जांच में चिकित्सकों और स्टाफ नर्स की लापरवाही सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
बताया गया कि जोरई गांव निवासी महिला रानी देवी प्रसव पीड़ा के बाद परिजनों के साथ महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि अस्पताल में उसे तत्काल भर्ती कर प्रसव की सुविधा नहीं दी गई। इसी दौरान अस्पताल से बाहर निकलने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और गेट के सामने सड़क किनारे ही प्रसव हो गया। आसपास मौजूद महिलाओं और राहगीरों ने चादर की ओट कर महिला की मदद की। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने महिला और नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया।
घटना सामने आने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात संविदा चिकित्सक डॉ. पंकज कुमार की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का सितंबर माह का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई, जबकि स्टाफ नर्स नीलम मौर्या को जिला अस्पताल से हटाकर औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संबद्ध किया गया है।
जांच में ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित पाए जाने की बात सामने आने पर वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलिमा धवन के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की भूमिका को लेकर भी शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। जांच रिपोर्ट में अस्पताल स्तर पर प्रशासनिक शिथिलता का भी उल्लेख किया गया है।
मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन ने ड्यूटी व्यवस्था की समीक्षा करने की बात कही है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता है और ड्यूटी में किसी तरह की लापरवाही मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन और प्रसूति सेवाओं की कार्यप्रणाली को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है।

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