शिवाजी इंटर कॉलेज की व्यवस्थाओं पर छात्रों ने उठाए सवाल, बीडीओ और खंड शिक्षा अधिकारी से शिकायत
नेवादा के शिवाजी इंटर कॉलेज में मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन कर बीडीओ और खंड शिक्षा अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा। विद्यार्थियों ने बिजली, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, शिक्षकों की उपस्थिति और कथित अतिरिक्त फीस वसूली समेत करीब 20 समस्याएं उठाईं। छात्रों ने शिकायत करने पर धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया।

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशाम्बी,उत्तर प्रदेश। जिले के नेवादा विकासखंड के शिवाजी इंटर कॉलेज में मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र-छात्राओं ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने खंड विकास अधिकारी नेवादा और खंड शिक्षा अधिकारी को अलग-अलग शिकायती पत्र देकर विद्यालय की व्यवस्थाओं से जुड़ी करीब 20 समस्याएं गिनाईं। छात्रों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में साफ-सफाई, पेयजल, बिजली, बैठने की व्यवस्था और शिक्षण व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। विरोध करने पर कथित रूप से परीक्षा में बैठने और पेपर न देने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
विद्यार्थियों द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि विद्यालय की कक्षाओं और शौचालयों की नियमित साफ-सफाई नहीं होती। शौचालयों में गंदगी और काई जमा होने तथा पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी छात्रों ने चिंता जताई है। विद्यार्थियों ने विद्यालय में स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ की व्यवस्था कराने की मांग की है। बिजली की समस्या, पंखे नहीं चलने और क्षतिग्रस्त कक्षाओं को लेकर भी शिकायत की गई है। छात्रों का आरोप है कि बारिश के दौरान कुछ कक्षाओं की छत से पानी टपकता है और कई कक्षाओं में बैठने के लिए उपलब्ध सीटें भी खराब हैं।
छात्रों ने विद्यालय में बोर्ड स्तर की पढ़ाई और खेलकूद के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि मच्छरों की समस्या के कारण विद्यार्थियों को परेशानी होती है और विद्यालय में किसी प्रकार की नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। छात्राओं ने भी विद्यालय में आवश्यक सुविधाओं की कमी और कुछ शिक्षकों के कथित अभद्र व्यवहार को लेकर शिकायत की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
फीस वसूली को लेकर भी विद्यार्थियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि कक्षा 10 के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क की तुलना में उनसे काफी अधिक रकम ली जा रही है। शिकायत में कक्षा 10 के विद्यार्थियों से करीब 3800 रुपये तथा कक्षा 12 के विद्यार्थियों से करीब 6000 रुपये तक शुल्क लिए जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा छात्रवृत्ति के नाम पर भी 100 रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया है। विद्यार्थियों ने फीस वसूली का पूरा विवरण जांचने की मांग की है।
शिकायती पत्र में विद्यालय के फर्नीचर या अन्य सामान के खराब होने पर उसका खर्च भी विद्यार्थियों से जबरन वसूलने का आरोप लगाया गया है। छात्रों का कहना है कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद पर्याप्त फर्नीचर उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कई बच्चों को बैठने में परेशानी होती है।
शिक्षकों की उपलब्धता और समय पालन को लेकर भी विद्यार्थियों ने सवाल उठाए हैं। छात्रों के अनुसार विद्यालय में सरकारी शिक्षक सीमित संख्या में हैं और उनसे कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम लिया जा रहा है। विद्यार्थियों ने कुछ शिक्षकों के समय पर विद्यालय नहीं पहुंचने का भी आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि पर्याप्त शिक्षकों और कक्षाओं की व्यवस्था नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत या विरोध करने पर कुछ शिक्षकों की ओर से परीक्षा में पेपर न देने अथवा अन्य कार्रवाई की धमकी दी जाती है। शिकायती पत्र में छात्रों ने इन आरोपों की जांच कराने और शिकायत करने वाले विद्यार्थियों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किए जाने की मांग की है।
प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने अधिकारियों से विद्यालय का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराने, शिकायत में उठाई गई समस्याओं की जांच करने तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। विद्यार्थियों ने विद्यालय में स्वच्छ पेयजल, बिजली, पंखे, साफ-सुथरे शौचालय, पर्याप्त फर्नीचर, सुरक्षित कक्षाएं और बेहतर शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित कराने की भी मांग की है।
छात्रों की शिकायतों के बाद अब संबंधित शिक्षा विभाग और प्रशासन की जांच तथा विद्यालय प्रबंधन के पक्ष का इंतजार है। जांच के बाद ही लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





