सीजेपी आंदोलन का असर: स्कूलों की स्थिति पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने की बैठक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के निर्देश
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई के नंदनवन बंगले में स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य के शिक्षा क्षेत्र की विस्तृत समीक्षा के लिए चार घंटे की बैठक की। बैठक में राज्य की शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की स्थिति और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नंदनवन बंगले पर करीब चार घंटे तक मैराथन बैठक की। बैठक में राज्य की शिक्षा व्यवस्था और विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली और अधिकारियों को स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
शिंदे ने निर्देश दिया कि शिक्षा विभाग अब मिशन मोड में काम करे और सरकारी योजनाओं का लाभ राज्य के प्रत्येक स्कूल तथा प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने राज्य के स्कूलों के आधुनिकीकरण और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों को भी प्रक्रिया से जोड़ा जाना चाहिए। विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण, मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक के दौरान सरकारी स्कूलों की मौजूदा स्थिति को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी चर्चा हुई। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत लातूर जिले के एक जिला परिषद विद्यालय का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सरकारी स्कूलों में कक्षाओं की कमी, पर्याप्त बेंच, शौचालय और सुरक्षित मार्ग जैसी समस्याओं का मुद्दा उठाया था।
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया था कि कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को अभी भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करनी पड़ रही है। उन्होंने राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार बताते हुए स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे के इस्तीफे की मांग भी की थी।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बैठक में कहा कि राज्य के सांसदों और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों को गोद लेकर उनके विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उपलब्ध सरकारी निधि और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से स्कूलों के विकास को गति देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्कूलों के विकास में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण में सुधार लाया जा सकता है।
शिंदे ने सरकारी स्कूलों के विकास के लिए कॉर्पोरेट और औद्योगिक क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताहों में कॉर्पोरेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के प्रमुखों के साथ बैठक की जाएगी। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण के लिए पेशेवर विशेषज्ञता, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, संसाधन और अन्य आवश्यक सहयोग प्राप्त करना होगा।
उपमुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और उनकी प्रगति की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए प्रत्येक सप्ताह बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि सामने आने वाली कमियों को समय रहते दूर किया जा सके और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को गति दी जा सके।




