भीड़ नियंत्रण की तैयारियों को परखा, उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने किया मॉक ड्रिल
उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस ने भीड़ नियंत्रण और दंगा जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की। डीसीपी राहूल अलवाल के नेतृत्व में करीब 200 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। वाटर कैनन, वज्र वाहन और टियर स्मोक गन समेत दंगा नियंत्रण उपकरणों के इस्तेमाल का अभ्यास कराया गया।

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली स्टेट हेड
उत्तर-पूर्वी दिल्ली। आंदोलन, प्रदर्शन और दंगा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उत्तर-पूर्वी जिले की दिल्ली पुलिस ने व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित कर पुलिसकर्मियों की तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमता को परखा। अभ्यास का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस बल के समन्वित एवं त्वरित कार्रवाई तंत्र को मजबूत करना रहा।
मॉक ड्रिल का आयोजन उत्तर-पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राहूल अलवाल, आईपीएस के पर्यवेक्षण में किया गया। इसमें जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, सभी थाना प्रभारियों (एसएचओ) सहित करीब 200 पुलिसकर्मियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान पुलिसकर्मियों को विभिन्न परिस्थितियों में भीड़ को नियंत्रित करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर उपद्रवी भीड़ को सुरक्षित एवं प्रभावी तरीके से तितर-बितर करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
ड्रिल के दौरान वाटर कैनन, वज्र वाहन, टियर स्मोक गन सहित विभिन्न दंगा नियंत्रण उपकरणों के इस्तेमाल का अभ्यास कराया गया। पुलिसकर्मियों को इन उपकरणों की तैनाती और संचालन के साथ ही परिस्थितियों के अनुरूप उनके प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई।
अभ्यास में टीम समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया, पुलिस बल की संरचना और रणनीतिक स्थिति निर्धारण पर विशेष जोर दिया गया। पुलिसकर्मियों को बड़ी भीड़, हिंसक प्रदर्शन, आंदोलन और संभावित कानून-व्यवस्था की चुनौती वाली परिस्थितियों में संयम और अनुशासन के साथ कार्रवाई करने का प्रशिक्षण दिया गया।
मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस अधिकारियों ने वास्तविक परिस्थितियों जैसी स्थितियां तैयार कर बल की तैयारियों का आकलन किया। अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में पुलिसकर्मी आपसी समन्वय के साथ तेजी से मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर सकें और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभ्यास से पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रण की परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। साथ ही इससे बल में अनुशासन, टीम भावना, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों से निपटने की दक्षता मजबूत होती है।
उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस ने कहा कि सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस लगातार प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और परिचालन तैयारियों पर जोर दे रही है, ताकि किसी भी प्रदर्शन या आकस्मिक कानून-व्यवस्था की स्थिति में त्वरित, संतुलित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।




