पैगंबर, दाढ़ी में आर्मी चीफ, बांग्लादेश की सेना में बढ़ता इस्लामीकरण, भारत के लिए अलर्ट

बांग्लादेश के आर्मी चीफ जनरल जमान ने मई महीने में हज यात्रा की थी, जिसके बाद से वह दाढ़ी बढ़ा रहे हैं। इसके ठीक बाद उन्होंने एक बटालियन का उद्घाटन किया, जिसकी कंपनी के नाम पैगंबर मोहम्मद के साथियों के नाम पर रखे गए हैं।

ढाका/एजेंसी। ढाका में बांग्लादेश की सेना में हालिया बदलावों को लेकर देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता के बीच अब सेना के ढांचे में दिखाई दे रहे परिवर्तनों ने नई बहस को जन्म दिया है। विशेष रूप से सेना की एक नवगठित बटालियन की कंपनियों के नामकरण को लेकर विभिन्न पक्षों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश सेना की सेकंड बटालियन की चार कंपनियों के नाम इस्लाम के प्रारंभिक दौर के प्रमुख व्यक्तित्वों—अबू बक्र, उमर, उस्मान और अली—के नाम पर रखे गए हैं। ये चारों इस्लाम के पहले राशिदुन खलीफा माने जाते हैं और पैगंबर मोहम्मद के करीबी साथियों में शामिल थे। इस नामकरण के सामने आने के बाद सेना में धार्मिक प्रतीकों के बढ़ते प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
बताया जाता है कि इस सेकंड बटालियन का गठन 28 जून को भाटियारी स्थित बांग्लादेश मिलिट्री एकेडमी में किया गया था। इसका उद्घाटन सेना प्रमुख वाकर-उज-जमान ने किया। हाल के महीनों में उनकी व्यक्तिगत छवि और धार्मिक आचरण को लेकर भी चर्चा रही है, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है।
इस कदम ने भारत के सुरक्षा तंत्र का भी ध्यान आकर्षित किया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही बांग्लादेश में उभरते कट्टरपंथ और क्षेत्रीय सुरक्षा पर उसके संभावित प्रभाव को लेकर सतर्क हैं। अधिकारियों का मानना है कि सेना में इस प्रकार के नामकरण को व्यापक बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, जिस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव और पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंध भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि, इन सभी घटनाक्रमों पर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।

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