नोएडा के महर्षि आश्रम जमीन प्रकरण में बड़ा खुलासा, 26 हजार फ्लैट अवैध घोषित;भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा आध्यात्मिक केंद्र

महर्षि आश्रम की जमीनों से जुड़े कथित घोटाले के मामले में अब नोएडा प्राधिकरण ने फ्लैट्स को अवैध घोषित कर दिया है। ईडी के शिकंजा कसने के बाद प्राधिकरण ने अब यह कार्रवाई की है।

नोएडा। उत्तर प्रदेश के प्रमुख योजनाबद्ध शहर नोएडा में महर्षि आश्रम की जमीनों से जुड़ा कथित घोटाला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद लंबे समय तक निष्क्रिय रहा नोएडा प्राधिकरण अब सक्रिय हो गया है और आश्रम की जमीनों पर बने करीब 26 हजार फ्लैट और मकानों को अवैध घोषित कर दिया है।
प्राधिकरण ने ग्राम सलारपुर खादर, भंगेल और हाजीपुर के कुल 51 खसरों पर हुए निर्माण को अवैध बताते हुए इन जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। साथ ही आम लोगों को इन भूखंडों में निवेश न करने की चेतावनी भी जारी की गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईडी, विशेष जांच दल (एसआईटी) और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में मामले की जांच तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने प्राधिकरण से खसरा संख्या 700-715, 723, 724, 728, 730-735, 745-752, 759-764, 779, 780 और 795-798 पर निर्माण की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगी है। जांच एजेंसी ने यह भी पूछा है कि यदि इन निर्माणों की अनुमति नहीं दी गई थी, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर आवासीय निर्माण कैसे हो गया और वर्षों तक प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
प्राधिकरण ने इन क्षेत्रों में बिजली, पानी, सीवर, सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न कराने का निर्णय लिया है। इससे पहले इन क्षेत्रों में तेजी से अवैध कॉलोनियां विकसित हुईं और करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ, जिससे अब अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले में एसआईटी को आरोपी संस्था और उससे जुड़े लोगों के नाम पर 40 और संपत्तियों की रजिस्ट्रियां मिली हैं। इससे पहले नोएडा के तीनों सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में 34 रजिस्ट्रियां सामने आई थीं। वर्ष 1992 से पहले की इन रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड दादरी स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से जुटाया गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ जमीनों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी प्राधिकरण पत्र, नकली बोर्ड रेजोल्यूशन और जाली मुहरों के जरिए ट्रस्ट की संपत्तियों की बिक्री की गई। अब तक ईडी सेक्टर-100 और सेक्टर-105 से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि निबंधन विभाग के दो सब-रजिस्ट्रारों से भी पूछताछ की जा चुकी है। छह से अधिक पीसीएस अधिकारियों और प्राधिकरण के 10 से अधिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी को तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। वहीं ईडी वित्तीय लेनदेन, अधिकारियों की भूमिका और कथित भ्रष्टाचार की परतें खोलने में जुटी है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद कई अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि स्पिरिचुअल रिजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट की करीब 40 बीघा जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिया गया। बिना प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए ही आश्रम क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कर दिया गया। 1970 और 1980 के दशक में महर्षि महेश योगी द्वारा स्थापित यह आश्रम कभी वैदिक शिक्षा और ध्यान का प्रमुख केंद्र था, लेकिन उनके निधन के बाद यहां अवैध कब्जों और निर्माणों का सिलसिला शुरू हो गया।

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