मचैल माता के भक्तों के लिए बड़ी खबर, बीआरओ ने 12 दिन में 140 फीट का बेली ब्रिज बनाकर रचा इतिहास
बीआरओ ने किश्तवाड़ की माचैल घाटी में 12 दिनों में 140 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाकर इतिहास रच दिया है, जिससे 2025 के बादल फटने के बाद बंद हुआ आस्था का मार्ग फिर से खुल गया है।

किश्तवाड़। पहाड़ी इलाकों की दुर्गम चुनौतियों के बीच सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने एक बार फिर अपनी दक्षता और प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए माचैल घाटी को मुख्य मार्ग से जोड़ दिया है। पिछले वर्ष 14 अगस्त 2025 को बादल फटने से चिशोती का पुल बह जाने के बाद घाटी का संपर्क पूरी तरह टूट गया था, जिससे जनजीवन और आस्था दोनों प्रभावित हुए थे। अब बीआरओ ने मात्र 12 दिनों में नया पुल बनाकर क्षेत्र को बड़ी राहत दी है।
बीआरओ के प्रोजेक्ट संपर्क के तहत 35 बीआरटीएफ की 118 आरसीसी इकाई ने चिशोती में 140 फीट लंबा ट्रिपल-डबल रिइनफोर्स्ड बेली ब्रिज तैयार किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, खराब मौसम और तेज बहाव के बावजूद इंजीनियरों और जवानों ने दिन-रात मेहनत कर इस पुल का निर्माण पूरा किया। सेना के इंजीनियरों के सहयोग से एबटमेंट निर्माण, भारी सामग्री की ढुलाई और पुल का सफल लॉन्च किया गया।
पुल का उद्घाटन व्हाइट नाइट कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल पी.के. मिश्रा ने किया। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पाडर-नागसेनी के विधायक सुनील कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे। लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा ने कहा कि बीआरओ ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि देश के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास कार्यों को गति दी जा सकती है।
यह पुल कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। माचैल माता यात्रा से पहले इसका निर्माण श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस मार्ग से होकर गुजरते हैं। इसके अलावा यह मार्ग किश्तवाड़-गुलाबगढ़-कुंडल-माचैल धुरी का हिस्सा है, जो आगे चलकर उमासी ला दर्रे के माध्यम से लद्दाख के जांस्कर क्षेत्र को निम्मू से जोड़ने में सहायक होगा।
रक्षा मंत्री द्वारा अगस्त 2025 की आपदा के बाद इस सड़क को बीआरओ को सौंपने की घोषणा की गई थी, जिसे मार्च 2026 में औपचारिक स्वीकृति मिली। अब इस पुल के निर्माण के साथ उस वादे को पूरा कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों के लिए यह पुल केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि जीवनरेखा के समान है। रोजमर्रा की जरूरतों, चिकित्सा सुविधाओं, शिक्षा और व्यापार के लिए इसी मार्ग पर निर्भरता है। पुल के निर्माण से जहां स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है, वहीं उन्होंने बीआरओ के प्रयासों की सराहना भी की है।




