क्या कानून सिर्फ जनता के लिए: मुरादाबाद में नियमों की धज्जियां उड़े रहे अफसरों के वाहन
मुरादाबाद में नियमों को ताक पर रखकर अफसरों और निजी वाहनों की अधूरी व अस्पष्ट नंबर प्लेट वाली गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं। 40 वाहनों की पड़ताल में 30 की नंबर प्लेटें पढ़ने लायक नहीं मिलीं। कई वाहनों पर नंबर कागज, प्रेशर हॉर्न या फीके रंग से ढके मिले।

मुरादाबाद/उत्तर प्रदेश। शहर की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकारी से लेकर निजी वाहनों तक में अधूरी, गलत और अस्पष्ट नंबर प्लेटों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन इन पर कार्रवाई न के बराबर दिखाई दे रही है। हाल ही में की गई पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
करीब 40 कारों और बाइकों की जांच में 30 वाहनों की नंबर प्लेटें मानक के अनुरूप नहीं पाई गईं। इनमें से 10 वाहन ऐसे थे जिन पर “उत्तर प्रदेश सरकार” लिखा हुआ था। कई वाहनों की नंबर प्लेट इतनी खराब स्थिति में थीं कि उन्हें पास से भी पढ़ पाना मुश्किल था।
जांच के दौरान एक ‘मजिस्ट्रेट’ लिखी बोलेरो के आगे और पीछे नंबर प्लेट पर कागज की चिप्पी लगी मिली, जिससे पूरा नंबर स्पष्ट नहीं था। वहीं ‘एसडीएम’ और ‘एस्कॉर्ट’ लिखी एक कार की नंबर प्लेट प्रेशर हॉर्न से ढकी हुई थी। इसके अलावा दो सरकारी कारों के आगे नंबर प्लेट तक नहीं लगी थी।
कुछ वाहनों में नंबर प्लेट के रंग इतने फीके हो चुके थे कि चलते समय उनका नंबर पढ़ना संभव नहीं था। कई निजी वाहनों में भी आगे की नंबर प्लेट गायब मिली। बाइकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं रही—एक बाइक में चार की जगह केवल तीन अंक ही पाए गए, जबकि एक पुलिस लिखी बाइक पर भी कागज की चिप्पी लगी मिली।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि कुछ वाहनों में आगे और पीछे के नंबर अलग-अलग थे, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) सभी वाहनों पर अनिवार्य होने के बावजूद इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
एआरटीओ प्रवर्तन आनंद निर्मल के अनुसार, हर महीने ऐसे करीब 50 वाहनों का चालान किया जाता है, जिनकी नंबर प्लेट मानकों के अनुरूप नहीं होती। वहीं एसपी यातायात सुभाष चंद्र गंगवार ने कहा कि गलत नंबर प्लेट लगाने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है और यह आगे भी जारी रहेगा।
इसके बावजूद शहर की सड़कों पर नियमों की अनदेखी लगातार जारी है, जिससे न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि किसी भी आपराधिक घटना की स्थिति में वाहन की पहचान करना भी मुश्किल हो सकता है।




