‘पद्मश्री से पहले पीएम मोदी को दंडवत प्रणाम’, सम्मान-संस्कार ने जीता देश का दिल
पुडुचेरी के प्रसिद्ध सिलंबम गुरु के. पजानिवेल को प्राचीन तमिल मार्शल आर्ट के संरक्षण, प्रचार और इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है।

नई दिल्ली/एजेंसी। पुडुचेरी के प्रसिद्ध सिलंबम गुरु के. पजानिवेल को पारंपरिक खेल और मार्शल आर्ट (सिलंबम) में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। अवार्ड लेने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंडवत प्रणाम किया। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। आइए जानते हैं कौन हैं के. पजानिवेल। 30 जनवरी 1973 को पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम में जन्मे पजानिवेल ने मास्टर राजाराम के मार्गदर्शन में सिलंबम में अपना सफर शुरू किया। कई दशकों के अपने करियर में, उन्होंने भारत और विदेशों में इस प्राचीन तमिल मार्शल आर्ट के संरक्षण, प्रचार और लोकप्रियता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पजानिवेल एक कुशल कलाकार और समर्पित शिक्षक हैं, जिन्होंने कई छात्रों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह पारंपरिक कला आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहे। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शनों, प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं के माध्यम से सिलंबम का प्रतिनिधित्व भी किया है।
इससे पहले, के. पजानिवेल को 2023 में मार्शल आर्ट्स के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके अन्य सम्मानों में 2012 में पुडुचेरी सरकार की ओर से दिया गया कलाइमामणि पुरस्कार, 2004 में नेहरू युवा केंद्र द्वारा दिया गया सर्वश्रेष्ठ युवा पुरस्कार और 2002 में दिया गया सिलंबम अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं। पद्म श्री सम्मान मिलने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए के. पजानिवेल ने आकाशवाणी को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे इस सम्मान को चार दशकों से अधिक समय से तमिल विरासत को दुनिया के सामने लाने के लिए प्रोत्साहन मानते हैं। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी सहयोग से स्कूलों में सिलंबम पढ़ाया जाना चाहिए, और वे वैश्विक स्तर पर सिलंबम को लोकप्रिय बनाने के लिए अपने सभी प्रयास जारी रखेंगे।




