दिल्ली के बड़े गुरुद्वारों में फोटोग्राफी बैन, लेकिन वीआईपी और पदाधिकारियों को छूट?

Photography banned in big gurdwaras of Delhi, but VIPs and officials exempted?

  • दिल्ली के गुरुद्वारे में वीआईपी नेताओं की वीडियोग्राफी पर सवाल उठे हैं
  • संगत का कहना है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए
  • दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी ने नियमों की मर्यादा बनाए रखने की अपील की

नई दिल्ली/एजेंसी। दिल्ली के बड़े गुरुद्वारों में आम संगत के लिए विडियो और फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन जब बात गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों और VIP नेताओं की आती है तो यह नियम कहीं न कहीं टूटते नजर आते हैं। संगत और सिख समाज के कई नेताओं ने इस दोहरे मापदंड पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अगर मर्यादा बनाए रखने के लिए फोटोग्राफी प्रतिबंधित है तो यह नियम सभी पर लागू होना चाहिए, चाहे वह आम श्रद्धालु हों या कोई बड़ा पदाधिकारी।दिल्ली की संगत इस भेदभाव को लेकर लगातार आवाज उठा रही है। सोशल मीडिया पर कई श्रद्धालुओं ने सवाल किया कि जब VIP नेता और पदाधिकारी गुरुद्वारे के अंदर जाकर विडियोग्राफी कर सकते हैं तो आम श्रद्धालुओं को ऐसा करने से क्यों रोका जाता है? संगत का कहना है कि अगर धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए नियम बनाए गए हैं तो उन्हें सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। सोशल मीडिया पर कई विडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें गुरुद्वारा कमिटी के कुछ सदस्य गुरुद्वारे के अंदर पेशेवर तरीके से रील शूट करवा रहे हैं।
आजकल सोशल मीडिया का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि धार्मिक स्थलों में भी ‘रील कल्चर’ हावी होता दिख रहा है। कई श्रद्धालु गुरुद्वारे में आते ही अपनी यात्रा को रिकॉर्ड करना शुरू कर देते हैं। हालांकि, इसका उद्देश्य कभी-कभी गुरुद्वारा और सिख इतिहास का प्रचार-प्रसार भी होता है, लेकिन जब यह मर्यादा को तोड़कर सिर्फ खुद को दिखाने तक सीमित रह जाता है, तब यह चिंता का विषय बन जाता है। इस मामले में सिख नेता और पूर्व डीएसजीएमसी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि अगर वीआईपी आ जाते हैं तो मर्यादा नहीं रहती। आम श्रद्धालुओं के लिए सख्त नियम हैं, लेकिन नेताओं और गुरुद्वारा कमिटी के मेंबर के लिए नियम ढीले हो जाते हैं। कमिटी के मेंबर और पदाधिकारी खुद सोशल मीडिया पर रील बनाकर डाल रहे हैं। उनके साथ गुरुद्वारा कमिटी का स्टाफ होता है, जो कैमरामैन की तरह काम करता है और उनके लिए विडियो शूट करता है। यह कैसी मर्यादा है? जीके ने कहा कि इन पदाधिकारियों को देखकर ऐसा लगता है कि हम गुरुद्वारे में गुरु के लिए नहीं आ रहे, बल्कि सोशल मीडिया पर दिखावा करने आ रहे हैं।
वहीं बैन पर उठ रहे सवालों पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमिटी के प्रेजिडेंट हरमीत सिंह कालका ने कहा कि वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी उनके लिए बैन है जो रील बनाने आ रहे हैं। कालका ने कहा कि कोई भी गुरुद्वारा कमिटी का पदाधिकारी, मेंबर या वीवीआईपी विडियो शूट कर सोशल मीडिया पर रीलें डाल रहा है तो यह गलत है। सभी खुद समझदार हैं कि ऐसा मर्यादा के खिलाफ है। कालका ने कहा कि हां, जब कोई दूसरे देश का प्रतिनिधि या हेड आता है तो उनके लिए फोटोग्राफी होती है ताकि लोगों तक यह मेसेज पहुंचाया जाए कि वह कैसे गुरु महाराज के सामने नतमस्तक हो रहे हैं। कालका ने कहा कि मैं एनबीटी के जरिए सभी मेंबर्स को अपील करता हूं कि वे रीलबाज न बनें, संगत द्वारा चुनकर आए हैं तो इसका ख्याल रखें और गुरुद्वारों में मर्यादा बनाए रखें।

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