राजस्थान में झूठे मुकदमे दर्ज कराए तो सीधे होगी संपत्ति जब्ती, डीजीपी ने दी चेतावनी

राजस्थान पुलिस अब एक्शन मोड में है। कानून-व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय में बुधवार को डीजीपी राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में करीब 6 घंटे तक चली हाईलेवल समीक्षा बैठक में बड़े और सख्त फैसले लिए गए।
जयपुर/एजेंसी। राजस्थान पुलिस अब एक्शन मोड में है। कानून-व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय में बुधवार को डीजीपी राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में करीब 6 घंटे तक चली हाईलेवल समीक्षा बैठक में बड़े और सख्त फैसले लिए गए। बैठक में साफ संदेश दिया गया कि अपराधियों, गैंगस्टर्स और झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों पर अब किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
डीजीपी ने एनडीपीएस, गैंगस्टर नेटवर्क, हार्डकोर क्रिमिनल्स, हिस्ट्रीशीटर्स और आदतन अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। खासतौर पर अपराधियों की अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने के लिए फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन को अनिवार्य रूप से लागू करने पर जोर दिया गया। साफ कहा गया कि अपराध से अर्जित संपत्ति अब सुरक्षित नहीं रहेगी—पुलिस सीधे आर्थिक चोट करेगी।
बैठक में पांच साल से ज्यादा पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने अधिकारियों से कहा कि पेंडेंसी खत्म करना ही अब प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए, ताकि न्याय व्यवस्था में तेजी लाई जा सके। बैठक में झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों पर भी कड़ा रुख अपनाया गया। डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 182 और 211 के तहत कार्रवाई की जाए। संदेश साफ है फर्जी केस करवाने वालों को अब कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
महिला और एससी/एसटी मामलों पर फोकस
महिला अत्याचार और एससी/एसटी से जुड़े मामलों की जांच की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन मामलों में संवेदनशीलता और पेशेवर जांच दोनों सुनिश्चित की जाएं।
ट्रैफिक और टेक्नोलॉजी पर जोर
सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर भी बड़े निर्देश दिए गए। लेन ड्राइविंग व्यवस्था का विस्तार, टोल प्लाजा पर जागरूकता अभियान और थानों के स्वागत कक्षों को डिजिटल सुविधाओं से लैस करने पर जोर दिया गया। अब शिकायतों की ऑनलाइन एंट्री और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए टेक्नोलॉजी का अधिक इस्तेमाल किया जाएगा।
बैठक में थाना गोद लेने जैसी नवाचार योजनाओं की समीक्षा की गई। इस योजना के तहत वरिष्ठ अधिकारी थानों को गोद लेकर उनकी कार्यप्रणाली में सुधार करेंगे। डीजीपी ने इस पहल की सराहना करते हुए अन्य जिलों को भी स्थानीय स्तर पर नए प्रयोग अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही बीट सिस्टम को मजबूत करने, महिला बीट ऑफिसर योजना को प्रभावी बनाने और फील्ड व मुख्यालय के बीच मजबूत फीडबैक सिस्टम विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।
सम्मान और विदाई का आयोजन
बैठक के दौरान पुलिस मुख्यालय में सम्मान और विदाई समारोह भी आयोजित किया गया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए भरतपुर रेंज आईजी कैलाश विश्नोई, कोटा रेंज आईजी राजेंद्र प्रसाद गोयल और भीलवाड़ा के दुर्गालाल ढोली को प्रतिष्ठित ‘डीजीपी डिस्क’ से सम्मानित किया गया। वहीं, सेवानिवृत्त हो रहे कोटा रेंज आईजी राजेंद्र प्रसाद गोयल को भावभीनी विदाई दी गई। इस मौके पर डीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय अग्रवाल, डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल और डीजी स्पेशल ऑपरेशंस आनंद श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
डीजीपी का साफ संदेश
डीजीपी ने अंत में स्पष्ट कहा कि राजस्थान पुलिस का लक्ष्य अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पारदर्शी, तकनीक आधारित और जनसेवा उन्मुख पुलिसिंग को मजबूत करना है। इस मैराथन बैठक के बाद यह साफ है कि प्रदेश में अपराधियों और फर्जी मुकदमेबाजों के खिलाफ अब सख्त दौर शुरू होने जा रहा है।




