45 दिनों के अंदर भारत समेत पांच देशों की रिफाइनरियों में आग, संयोग या साजिश

राजस्थान के पचपदरा (बाड़मेर) में एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन 21 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को करना था। यह 13 साल पुराना सपना सच होने ही वाला था, लेकिन उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले इसके मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट में भीषण आग लग गई।

नेशनल डेस्क। पिछले 45 दिनों में भारत सहित पांच देशों की तेल रिफाइनरियों और तेल क्षेत्रों में आग लगने की खबरें सामने आई हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि ये घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण तेल और गैस को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है क्या यह महज संयोग है या किसी साजिश का हिस्सा, जिसके जरिये देशों की रिफाइनिंग क्षमता को बाधित करके कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहर है।
राजस्थान के पचपदरा (बाड़मेर) में एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन 21 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को करना था। यह 13 साल पुराना सपना सच होने ही वाला था, लेकिन उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले इसके मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट में भीषण आग लग गई।
हालांकि मंत्रालय ने कहा है कि रिफाइनरी के ढांचे सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने उद्घाटन को टाल दिया है। इसके अलावा, 12 अप्रैल को मुंबई तट के पास ओएनजीसी के तेल क्षेत्र में भी आग लगने की खबर आई थी। हैरानी की बात यह है कि फरवरी (जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए) के बाद से युद्ध क्षेत्र से बाहर के 6 देशों में तेल संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
रूस को छोड़कर, अन्य देशों (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको, इक्वाडोर और भारत) ने इन आग की घटनाओं का कारण “आंतरिक तकनीकी खराबी” बताया है, न कि कोई सीधा हमला। लेकिन जानकारों को इसमें एक “पैटर्न” नजर आ रहा है।
इंटरनेट मीडिया पर विशेषज्ञ इसको लेकर चर्चा कर रहे हैं कि क्या ये घटनाएं रिफाइनरी के अंदर किसी साजिश का का नतीजा है। राजस्थान रिफाइनरी में आग लगने से चार दिन पहले ही इंटरनेट मीडिया पर कुछ विशेषज्ञों ने अंदेशा जताया था कि भारत के दुश्मन देश अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने और तेल की कीमतें बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को निशाना बना सकते हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जहां से वैश्विक तेल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें, जो फरवरी में 66 डालर प्रति बैरल थीं, मार्च में 100 डालर के पार पहुंच गईं।

पिछले 45 दिनों में दुनिया के अलग-अलग कोनों में तेल संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है:

  • इक्वाडोर (1 मार्च): देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी “एस्मेरल्डस” में पंप खराब होने से आग लगी।
  • मैक्सिको (17 मार्च): ओल्मेका रिफाइनरी में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई।
  • अमेरिका (23 मार्च और 10 अप्रैल): टेक्सस की “वैलेरो” रिफाइनरी में धमाका हुआ और बाद में “मैराथन” रिफाइनरी में तकनीकी खराबी के कारण आग लग गई।
  • ऑस्ट्रेलिया (16 अप्रैल): मेलबर्न के पास वीवा की “कोरियो” रिफाइनरी में आग लगी, जिससे देश की 10 प्रतिशत ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है। l म्यांमार (20 अप्रैल): सागरिंग क्षेत्र में एक बंदरगाह पर 10 ईंधन टैंकरों में धमाका हुआ और वे जलकर खाक हो गए।

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