पूर्वी दिल्ली में जर्जर फुटपाथों से नागरिकों की सुरक्षा दांव पर, फुटपाथों की बदहाली से सड़क पर चलने को मजबूर लोग

पूर्वी दिल्ली के यमुनापार इलाकों में टूटे और अतिक्रमणग्रस्त फुटपाथों के कारण लोग जान जोखिम में डालकर सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। मयूर विहार, खजूरी खास जैसे क्षेत्रों में यह समस्या गंभीर है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को विशेष परेशानी होती है। नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की लापरवाही पर निवासियों ने शिकायतें की हैं।
दिल्ली ब्यूरो। पूर्वी दिल्ली के यमुनापार इलाके में टूटे और जर्जर फुटपाथों ने आम नागरिकों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। स्वामी दयानंद मार्ग, मयूर विहार, खजूरी खास, करावल नगर, गोकुलपुरी और सोनिया विहार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में फुटपाथ पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई स्थानों पर फुटपाथों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। मजबूरन लोगों को व्यस्त सड़कों पर पैदल चलना पड़ रहा है, जिससे हर समय दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और जीवन से जुड़ा प्रश्न है। बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में जलभराव के कारण स्थिति और विकराल हो जाती है, जब रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो जाते हैं। नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम और लोक निर्माण विभाग को बार-बार शिकायतें देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही ने लोगों को सड़क पर डरकर सफर करने पर मजबूर कर दिया है।
सामाजिक दृष्टि से यह समस्या केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि शहरी जीवन की असमानताओं को भी उजागर करती है। शहरों में विकास कार्यों का दावा किया जाता है, लेकिन पैदल चलने वालों की सुरक्षा को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। फुटपाथ केवल चलने का रास्ता नहीं, बल्कि बच्चों की स्कूल यात्रा, बुजुर्गों की सुरक्षित आवाजाही और महिलाओं की स्वतंत्र गतिशीलता का आधार हैं। जब ये टूट जाते हैं, तो समाज के सबसे कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर फुटपाथों की मरम्मत, अतिक्रमण हटाने और नियमित सफाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा का सवाल है। जिला विकास समिति के अध्यक्ष अनिल गोयल ने बताया कि विकास कार्य शुरू हो चुके हैं और जल्द ही फुटपाथ की मरम्मत का काम शुरू होगा। जिन स्थानों पर फुटपाथ नहीं हैं, वहां नए फुटपाथ बनाए जाएंगे।
यह खबर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि शहरी विकास केवल फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। पैदल चलने वालों की सुरक्षा और सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फुटपाथों की मरम्मत और रखरखाव प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, क्योंकि यह सीधे नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है। जब तक इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक शहरों में सुरक्षित और समावेशी जीवन की कल्पना अधूरी ही रहेगी।




