मेरठ में मोबाइल टावर चोरी करने वाले गैंग का सरगना शाहरुख मलिक गिरफ्तार

80 करोड़ की लूट का खुलासा

मेरठ/उत्तर प्रदेश। मेरठ पुलिस की स्वाट टीम ने मोबाइल टावरों को निशाना बनाकर करोड़ों की लूट करने वाले एक शातिर गैंग का पर्दाफाश करते हुए उसके सरगना शाहरुख मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से विभिन्न राज्यों से चोरी किए गए मोबाइल टावर उपकरण, कीमती कार्ड और अन्य सामान बरामद हुआ है, जिसकी कुल कीमत करीब 15.40 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह गिरोह लंबे समय से कई राज्यों में सक्रिय था और अभी तक 80 करोड़ से ज्यादा के उपकरण चोरी कर चुका था, आरोपी के खिलाफ 13 जिलों में 72 मुकदमे दर्ज हैं।
एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में मोबाइल टावरों से लगातार चोरी और लूट की घटनाएं सामने आ रही थीं। बदमाश खासतौर पर टावरों से बेस बैंड यूनिट (बीबीयू) और अन्य महंगे उपकरण चोरी कर लेते थे, जिससे मोबाइल नेटवर्क बाधित हो जाता था। कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
इस समस्या से निपटने के लिए एक टेलीकॉम कंपनी ने अपने बीबीयू यूनिट में ट्रैकिंग डिवाइस लगाना शुरू किया। हाल ही में पंजाब में एक टावर से बीबीयू चोरी होने के बाद उसकी लोकेशन ट्रैक की गई, जो मेरठ के जाकिर कॉलोनी में जाकर बंद हो गई। इसके बाद कंपनी के सुरक्षा अधिकारियों ने मेरठ पुलिस को सूचना दी।
एसएसपी के निर्देश पर स्वाट टीम और लोहियानगर पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाते हुए एक सप्ताह की कड़ी निगरानी और जांच के बाद गैंग के सरगना शाहरुख मलिक को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के घर की तलाशी लेने पर पुलिस को 237 बीबीयू यूनिट और 156 कॉपर कार्ड बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन उपकरणों की कीमत लगभग 15.40 करोड़ रुपये है।
पुलिस के अनुसार, शाहरुख पर केवल पंजाब के 13 जिलों में मोबाइल टावर लूट के 72 मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा मुरादाबाद में भी उसके खिलाफ एक मामला दर्ज है। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अब तक कई राज्यों में 80 करोड़ रुपये से अधिक के टावर उपकरण लूट चुका है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है, जिसमें यूपी, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं। पुलिस को जानकारी मिली है कि मुजफ्फरनगर के एक नेता का भाई इस गैंग को फंडिंग करता था, जबकि दिल्ली का एक युवक चोरी का सामान खरीदकर आगे सप्लाई करता था। पुलिस अब इन सभी संदिग्धों की तलाश में जुटी है और गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
बीबीयू यूनिट को टेलीकॉम नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। इसके हटते ही मोबाइल सिग्नल तुरंत बंद हो जाते हैं। इस यूनिट में सोना, चांदी, पैलेडियम और तांबा जैसी कीमती धातुएं इस्तेमाल होती हैं, जिसके कारण यह लुटेरों के निशाने पर रहती है। एक बीबीयू से लगभग आठ ग्राम सोना और 40 ग्राम चांदी निकाली जा सकती है। गिरोह इन धातुओं को निकालकर बाकी उपकरणों को मुंबई और चीन में बेच देता था।
आईटी विशेषज्ञों के अनुसार, बीबीयू का दुरुपयोग गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसके जरिए ड्रोन संचालन, मिनी टेलीफोन एक्सचेंज चलाने और अंतरराष्ट्रीय कॉल को लोकल कॉल में बदलने जैसी गतिविधियां संभव हैं। इसी कारण पुलिस अब इस मामले को साइबर अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस की चार टीमें गैंग के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं।

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