पिंक सिटी में ‘पिंक हाथी’ पर फोटोशूट, रशियन फोटोग्राफर का 10 मिनट का शौक कहीं बन ना जाए आफत

जयपुर/एजेंसी। राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे दुनिया ‘पिंक सिटी’ के नाम से जानती है, इन दिनों एक अनोखे और विवादित फोटोशूट को लेकर चर्चा के केंद्र में है। एक रूसी फोटोग्राफर की ‘क्रिएटिविटी’ ने सोशल मीडिया पर गुस्से का ऐसा सैलाब ला दिया है कि अब मामला सरकारी जांच और वन विभाग की कार्रवाई तक पहुंच गया है।
रूस की मशहूर ट्रैवलिंग आर्ट फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने जयपुर के हेरिटेज लुक से प्रभावित होकर एक प्रोजेक्ट तैयार किया। इस फोटोशूट में मॉडल यशस्वी के साथ एक विशालकाय हाथी को सिर से पांव तक चमकीले गुलाबी रंग में रंगा हुआ दिखाया गया। जैसे ही ये तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हुईं, कला की तारीफ से ज्यादा ‘पशु क्रूरता’ के आरोप लगने शुरू हो गए।
जूलिया का दावा है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए जयपुर में 6 हफ्ते बिताए और सुबह तड़के उठकर लोकेशन तलाशी। उनका कहना है कि हाथी पर इस्तेमाल किया गया रंग पूरी तरह ऑर्गेनिक और स्थानीय था, जिसे त्योहारों में भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं। एक यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘आज के डिजिटल और AI के युग में एक मूक प्राणी को पेंट की बाल्टी में डुबो देना कला नहीं, बल्कि उसका शोषण है। जूलिया को इस घिनौनी हरकत के लिए माफी मांगनी चाहिए।’ वन्यजीव विशेषज्ञों का भी मानना है कि हाथी की त्वचा अत्यंत संवेदनशील होती है और भारी मात्रा में रंग पोतना उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
विवाद बढ़ते देख हाथी के मालिक शादिक खान और हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने सफाई पेश की। उन्होंने बताया कि जिस हथिनी का इस्तेमाल किया गया उसका नाम ‘चंचल’ था। मालिक के अनुसार, चंचल 65 साल की थी और केवल 10 मिनट के शूट के लिए उस पर कच्चा गुलाल लगाया गया था, जिसे तुरंत पानी से धो दिया गया। चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि हाथी ‘चंचल’ का फरवरी में निधन हो चुका है।
मामले की गंभीरता और सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध को देखते हुए राजस्थान वन विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने इस पूरे फोटोशूट और हाथी के साथ किए गए बर्ताव की जांच के आदेश दिए हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी जंगली जानवर को व्यावसायिक लाभ के लिए कष्ट पहुंचना या उसे अप्राकृतिक रूप से रंगना अपराध की श्रेणी में आ सकता है। यदि जांच में यह पाया गया कि हाथी को रंगने से उसे शारीरिक कष्ट हुआ या नियमों का उल्लंघन हुआ, तो फोटोग्राफर और हाथी मालिक दोनों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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