लोकसभा में पास हुआ दिवालिया इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी बिल, बैंकिंग सेक्टर को मिलेगी मजबूती

नई दिल्ली/एजेंसी। लोकसभा ने आज दिवालिया इन्सॉल्वेंसी व बैंकरप्सी कानून (आईबीसी) में व्यापक संशोधन वाला विधेयक पास कर दिया। इस विधेयक में दिवालिया प्रक्रिया को और तेज, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के प्रावधान किये गये हैं, जैसे हर दिवालिया प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के तहत पूरा करना, अदालत के बाहर भी समझौते के जरिए दिवालिया प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का विकल्प और दूसरे देशों में दिवालिया प्रक्रिया को लागू करना शामिल किया गया है। वित्त एवं कारपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2016 में लागू हुई आईबीसी ने देश के बैंकिंग सेक्टर को नई मजबूती दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हाल के वर्षों में बैंकों की मजबूत स्थिति का श्रेय काफी हद तक आईबीसी को जाता है।
नए संशोधनों के जरिए अब छोटे और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को भी इस कानून की मुख्यधारा में लाया जाएगा, ताकि वहां भी वित्तीय विवादों का तेज समाधान लागू हो सके। सीतारमण ने लोकसभा में बताया कि आईबीसी, 2016 में कुल 12 संशोधन किए जा रहे हैं। यह विधेयक हितधारकों का मूल्य अधिकतम करने, शासन प्रक्रिया सुधारने और व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए लाया गया है। इसमें दिवालिया को लेकर वैश्विक स्तर पर चल रही कुछ बेहतर प्रथाओं को भी शामिल किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि आईबीसी में व्यापक मुकदमेबाजी मुख्य देरी का कारण रही है।
नए प्रावधानों से इसे रोका जाएगा, हितधारकों का मूल्य अधिकतम होगा और प्रक्रिया सुचारू बनेगी। यह छोटे-मझोले उद्योगों सहित पूरे कारोबारी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती देगा। विधेयक अब राज्यसभा में भेजा जाएगा। सनद रहे कि विधेयक का मसौदा 12 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे चयन समिति को भेजा गया।
समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी और इसकी सभी सिफारिशों को केंद्र ने स्वीकार कर लिया है। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं से मेल खाने के लिए ग्रुप और क्रॉस-बार्डर इंसाल्वेंसी को सक्षम बनाने वाले फ्रेमवर्क बनाने की सिफारिश की थी। इससे विेदशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलने की बात कही गई थी।वित्त मंत्रालय ने बताया है कि एमएसएमई के लिए विशेष प्रावधान पहले से मौजूद हैं, लेकिन नए संशोधन उन्हें और मजबूत बनाएंगे। एमएसएमई को आईबीसी की धारा 29ए(सी) और 29A(एच) के तहत अयोग्यता से छूट दी गई है, जिससे मौजूदा प्रमोटर अपने व्यवसाय को बचाने में भाग ले सकें।
छोटे उद्योगों को मिलेगा फायदा
इसके पहले 2021 के छठे संशोधन में कॉर्पोरेट एमएसएमई के लिए प्री-पैकेज्ड इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू किया गया था, जो मामलों को तेज से सुलझाने में मदद करता है। अब इस विधेयक के माध्यम से दस्तावेजी प्रक्रिया को घटा कर इस प्रक्रिया और आसान बनाया जा रहा है। इससे छोटे उद्योगों को तेज और कम खर्चीला समाधान मिलेगा। एक अहम बदलाव यह किया जा रहा है कि दिवालिया प्रक्रिया में जाने वाली कंपनी की मौजूदा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या साझेदार सुरक्षा उपायों के साथ प्रबंधन संभालते रहेंगे। दिवालिया के लिए दोषी साबित होने पर 14 दिनों के अंदर आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करना अनिवार्य किया जा रहा है।
एनसीएलएटी में अपीलों का फैसला तीन महीने के भीतर करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही व्यर्थ या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से देरी रोकने के लिए एक लाख रुपये से दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया जा रहा है। कार्मिकों के बकाया को आईबीसी में उच्च प्राथमिकता दी गई है और इन्हें सिक्योर्ड क्रेडिटर्स के बराबर माना गया है।




