कंगना रनौत पर आगरा कोर्ट ने लगाया 500 रुपये का जुर्माना, मंडी भाजपा सांसद को अंतिम मौका दिया

आगरा/उत्तर प्रदेश। फिल्म एक्ट्रेस एवं बीजेपी सांसद कंगना रनौत के मामले में सोमवार को एक बार फिर से सुनवाई नहीं हो सकी। उनकी पैरवी कर रहीं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी बहस करने के लिए कोर्ट में हाजिर नहीं हो सकीं। उन्होंने सुनवाई के लिए अदालत से समय मांगा है। इस पर वादी पक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया। कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कंगना रनौत पर 500 रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 3 अप्रैल की तिथि तय की है। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी सांसद कंगना रनौत के विरुद्ध स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए अनुज कुमार सिंह की कोर्ट में किसानों के अपमान एवं राजद्रोह के मामले में मामला विचाराधीन है।
कंगना रनौत की वकील नहीं हुईं हाजिर
सोमवार को बहस होनी थी, लेकिन कंगना रनौत की सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी कोर्ट में बहस के लिए हाजिर नहीं हुईं। कंगना की ओर से अनसूया चौधरी की जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान एवं स्थानीय अधिवक्ता विवेक शर्मा ने एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि वरिष्ठ अधिवक्ता की तबीयत खराब होने के कारण आज वह बहस करने में असमर्थ हैं। उन्हें कोई अग्रिम तिथि दी जाए। वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान एवं राजवीर सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया।
वरिष्ठ अधिवक्ता वादी रमाशंकर शर्मा ने बताया कि विगत तीन तिथियां से विपक्ष की अधिवक्ता हर बार बीमारी का बहाना लगाकर मामले को टालना चाहती हैं। वह बार-बार कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रही हैं। पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने यह भी मांग की अब न्यायालय विपक्ष को बहस करने का अवसर समाप्त किया जाए, लेकिन विपक्ष की ओर से उपस्थित अधिवक्ता सुधा प्रधान के अनुग्रह करने पर कोर्ट ने कंगना रनौत पर 500 रुपये के जुर्माने के आदेश करते हुए बहस के लिए अंतिम अवसर दिया है।
महात्मा गांधी और किसानों पर दिए गए विवादित बयानों के बाद राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट रमाशंकर शर्मा ने 11 सितंबर 2024 को कोर्ट में वाद दायर किया था। लंबे समय से मामले में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने कई बार कंगना रनौत को नोटिस देकर तलब किया था, लेकिन अभी तक कंगना कोर्ट में हाजिर नहीं हुई हैं। बहस के लिए अंतिम अवसर दिया है।
कंगना रनौत मामले में 3 अप्रैल को होगी सुनवाई
वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह भैया ने कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग भी प्रस्तुत की, जिसमें दलील दी गई के कोई भी अधिवक्ता किसी वादकारी की पैरवी तो कर सकता है, लेकिन वादकारी का बयान दर्ज कराने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने उक्त रूलिंग को पत्रावली पर रखते हुए सुनवाई के लिए 3 अप्रैल 2026 की तिथि नियत कर दी।

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