पश्चिमी एशिया में महासंग्राम से दिल्ली के बाजारों की बढ़ी टेंशन

5000 करोड़ का कारोबार प्रभावित होने की आशंका

दिल्ली ब्यूरो। पश्चिम एशिया में महासंग्राम से दिल्ली के उद्योग व व्यापार जगत के साथ निर्यातकों की चिंताएं बढ़ गई है। क्योंकि, यूएई के प्रमुख शहर दुबई से होते हुए पश्चिम एशिया के साथ यूरोप के देशों को भारतीय उत्पादों का निर्यात होता है। अमेरिकी-इजराइल हमले के बाद से ईरान द्वारा पश्चिमी एशिया के कई देशों में स्थिति अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया जा रहा है। दुबई में भी हमला हुआ है। उसके चलते खारी बावली, चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, कश्मीरी गेट समेत अन्य बाजारों में चिंता है। बाजार के जानकारों के अनुसार, अगर युद्ध आगे भी जारी रहती है तो दिल्ली के करीब 5,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा।
दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन (डीएचएमए) के महासचिव श्रीभगवान बंसल के अनुसार, न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि यूरोप भारतीय उत्पादों का बड़ा बाजार है। ये निर्यात दुबई के रास्ते होते हैं। ईरान समेत पश्चिम एशिया में शेरवानी के साथ अन्य भारतीय परिधान लोकप्रिय हैं। ईरान में ही कई परिधान निर्यातकों का बकाया महीनों से फंसा है। तैयार माल के निर्यात में भी अनिश्चितता है।
होलसेल हौजरी एसोसिएशन के महासचिव देवेंद्र जैन के अनुसार, अगर यह हालात बने रहे तो हजारों करोड़ का निर्यात प्रभावित होगा। वैसे, ईरान में युद्ध वाले हालात एक वर्ष से है। इसलिए ईरान से आते पिस्ता, आलू बुखारा व मामरा जैसे सूखे मेवे के दाम पहले से बढ़े हुए हैं।
खारी बावली के थोक कारोबारी धीरज सिंधवानी कहते हैं कि एक वर्ष से अधिक समय से ईरान से सूखे मेवे की आपूर्ति प्रभावित है। समय पर उत्पाद न आने से ऑर्डर को पूरा करने में दिक्कत आ रही है। वहां संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। दिल्ली में ईरानी खजूर के साथ पिस्ता लोकप्रिय है। पिस्ता की पूर्ति ईरान के प्रतिद्वंद्वी अमेरिका से पूरी की जा रही है, लेकिन इसके चलते उसका दाम दोगुना हो चुका है। वर्ष 2024 तक खारी बावली में पिस्ता जहां 800 से 1,100 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध था। अब वह 1,400 से 1,900 रुपये तक पहुंच गया है। ईरानी खजूर भी 20 प्रतिशत उछाल लेते हुए 300 से 700 रुपये में उपलब्ध है। आने वाले दिनों में दाम बढ़ने की आशंका है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, दिल्ली से जो निर्यात युद्ध प्रभावित देशों को हुआ था वो रास्ते में अटका हुआ है। साथ ही जो ऑर्डर मिला हुआ है उसकी आपूर्ति को लेकर भी दुविधा की स्थिति है, क्योंकि पोर्ट, एयरपोर्ट, कार्गो आदि सुविधाएं भी बाधित हो गई हैं। भागीरथ पैलेस से दवा व चिकित्सकीय उपकरणों तथा कश्मीरी गेट मार्केट से ऑटो पार्ट़्स का निर्यात भी ईरान समेत प्रभावित मुल्कों में होता है। जबकि, दरीबा व कूचा महाजनी जैसे गहनों के बाजार में ईरान से हकीक व फिरोजा समेत अन्य कीमती पत्थर तथा तिलक बाजार में रसायन ईरान से आता है। जो प्रभावित होगा।

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