‘अतिक्रमण मुक्त’ की खोखली रिपोर्ट भेज आंखों में धूल झोंक रहे जिम्मेदार
पोल खोल रही नोएडा की तस्वीरें

नोएडा। प्रदेश के विंडो शहर में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी शासन को ‘अतिक्रमण-मुक्त की खोखली’ रिपोर्ट भेजकर शीर्ष अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने से बाज नहीं आ रहे हैं। हैरत की बात है कि शहर की तमाम सड़कें अतिक्रमण के कारण व्यस्त हैं, लेकिन अधिकारी सच्चाई जानने के बावजूद अनजान बने हुए हैं। पिछले दिनों मुख्य कार्यपालक अधिकारी के आदेश पर विभिन्न स्थानों पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर कड़ा संदेश दिया गया, लेकिन चंद घंटों बाद ही अतिक्रमण में फंसकर लोगों की सांसे फूलने लगीं। अतिक्रमण की स्थिति देखने के लिए पड़ताल की, जिसमें तस्वीरों ने दावों की पोल खोल दी।
जिला अस्पताल के पास नोएडा प्राधिकरण का कार्यालय बना हुआ है। बावजूद इसके अस्पताल के सामने मुख्य सड़क पर ही रेहडी-पटरी वालों का अतिक्रमण रहता है, लेकिन अधिकारी कागजों में अतिक्रमण मुक्त सड़कें बनाकर अपनी पीठ थपथपाते घूमरहे हैं। इसी तरह जिला अस्पताल की बाउंड्री के पास भी ई-रिक्शा और ऑटो चालकों का जमावड़ा रहता है।
भंगेल के निवासियों का आरोप है कि अतिक्रमण के कारण सड़क पर वाहनों की गति धीमी हो जाती है। इसके चलते गंभीर बीमारी के मरीजों को अस्पताल लाने में दिक्कत होती है। कार्यवाहक सीएमएस भी अधिकारियों से अतिक्रमण हटवाने के लिए कई बार मांग कर चुकी हैं।
अतिक्रमणकारियों का जाल केवल सेक्टर-39 तक सीमित नहीं है। अधिकारियों की लचर कार्यशैली और अनदेखी से सेक्टर-63 की कई प्रमुख सड़कों भी अतिक्रमण से व्यवस्त रहती हैं। सेक्टर-ए ब्लाक में कई सड़कों पर रेहडली-पटरी वालों का कब्जा रहता है, जबकि सेक्टर में कई औद्योगिक इकाइयां हैं। उनमें देश-विदेशों के प्रतिनिधि महत्वपूर्ण बैठकें आते रहते हैं।
वहीं, ऐसे में उन्हें जाम या कई बार धीमी गति का सामना करना पड़ता है। नोएडा इंटरप्रिन्योर एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की अतिक्रमण हटवाने पर अधिकारियों संग बैठक भी हो चुकी है, लेकिन खानापूर्ति के अलावा कुछ नहीं मिलता।
सेक्टर- 35 स्थित मोरना डिपो के बाहर अतिक्रमणकारी का कब्जा कई महीनों से बना हुआ है। आलम ये है कि पुलिस चौकी और डिपो का मुख्य गेट भी अतिक्रमण की आड़ में छिप जाते हैं। सोमवार को संवाददाता ने देखा कि रेहडी-पटरी वालों ने फुटपाथ को भी दुकान का अड्डा बना लिया था जबकि अन्य वाहनों के खड़े रहने से वहां मोड़ भी छोटा हो गया, जिससे अन्य चालकों को दिक्कत हो रही थी।
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