दिल्ली में 1957 के असोला बारातघर के निर्माण में देरी

कोर्ट ने डीडीए पर लगाया जुर्माना, एसडीएम साकेत को नोटिस

दक्षिणी दिल्ली। असोला गांव वर्ष 1957 का बना हुआ बारातघर खंडहर में बदल चुका है। उसके स्थान पर सामुदायिक भवन बनाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण को आठ सप्ताह में काम शुरू का आदेश हाई कोर्ट ने 25 अक्टूबर 2024 को दिया था।
एक वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस रही। कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2025 भी फटकार लगाई था। बावजूद इसके 19 जनवरी की सुनवाई में एसडीएम साकेत या डीडीए ने स्टेटस रिपोर्ट जमा नहीं की। इस पर एसडीएम साकेत को नोटिस जारी कर कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट जमा करने व अगली सुनवाई में वर्चुअल शामिल होने को कहा है। वहीं न्यायाधीश सचिन दत्ता ने डीडीए पर 10 हजार का जुर्माना लगाया है, जिसे तीन सप्ताह के भीतर जमा करना होगा।
लगभग 50 हजार की आबादी वाला असोला गांव। वर्ष 2021 से पहले तक इसकी गिनती ग्रामीण इलाकों में होती थी। फिर इसका शहरीकरण किया गया। गांव में छोटे किसान, मजदूर, भूमिहीन लोगों की बड़ी आबादी निवास करती है।
बावजूद इसके क्षेत्र में कोई सामुदायिक भवन नहीं। धार्मिक या सामाजिक आयोजन के लिए महंगे फार्म हाउस बुक करने पड़ते हैं। लगभग 68 वर्ष पुराना जो सामुदायिक केंद्र ग्राम सभा के खसरा नंबर-43 (शामलात थोक भूमि) पर था, वह अब खंडहर है।
शहरीकरण के बाद ग्राम सभा का यह खसरा नंबर अब डीडीए। इसी के स्थान पर स्थानीय निवासी अब नए सामुदायिक भवन की मांग कर रहे हैं। याचिकाकर्ता ऋषिपाल के मुताबिक कोर्ट से आदेश मिलने के बाद भी कोई काम शुरू नहीं किया जा रहा है। मामले में बीते डेढ़ वर्ष से हो रही घोर लापरवाही को लेकर कोर्ट ने भी असंतोष जताया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button