मुंबई के मलाड स्टेशन पर खूनी वारदात, प्रोफेसर की चाकू गोदकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार

मुंबई/एजेंसी। मुंबई के पश्चिमी उपनगर मलाड रेलवे स्टेशन पर शनिवार को एक 33 वर्षीय प्रोफेसर की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। जीआरपी के अनुसार, पीड़ित आलोक कुमार सिंह विले पार्ले से कांदिवली की ओर जा रहे थे, तभी शाम करीब 5.40 बजे उन पर जानलेवा हमला हुआ। एक अधिकारी ने बताया कि विले पार्ले के एनएम कॉलेज में पढ़ाने वाले सिंह का यात्रा के दौरान लोकल ट्रेन में एक सहयात्री से झगड़ा हो गया। ट्रेन के मलाड स्टेशन पहुंचते ही उस व्यक्ति ने सिंह पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे वे गिर पड़े। अधिकारी ने बताया कि हमलावर सिंह को बुरी तरह से घायल और खून से लथपथ छोड़कर मौके से फरार हो गया। अन्य यात्रियों द्वारा सूचना मिलने पर रेलवे पुलिस कांदिवली निवासी सिंह को पास के अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर बोरीवली जीआरपी ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

मुंबई लोकल ट्रेन में हुए एक झगड़े ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए खत्म कर दीं। गणित के प्रोफेसर आलोक सिंह अपनी पत्नी का जन्मदिन मनाने घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में ट्रेन के भीतर हुई चाकूबाजी में उनकी जान चली गई। अब परिवार ने पुलिस कार्रवाई और इलाज में हुई देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आलोक सिंह, जो विले पार्ले के एक कॉलेज में गणित के प्रोफेसर थे वे अपनी पत्नी पूजा आलोक सिंह के साथ मालाड ईस्ट के कुरार गांव स्थित प्रतापनगर एसआरए सोसायटी में रहते थे। दोनों की शादी को तीन साल हुए थे और वे किराए के फ्लैट में रह रहे थे।
पूजा सिंह ने बताया कि उनके जन्मदिन के मौके पर दोनों ने बाहर डिनर पर जाने का फैसला किया था। आलोक उस दिन कॉलेज से एक घंटा पहले निकले थे। आमतौर पर वह शाम 6.30 बजे घर पहुंचते थे, लेकिन उस दिन 5.30 बजे मालाड पहुंच गए थे। कुछ देर बाद पूजा को पुलिस का फोन आया और बताया गया कि आलोक ट्रेन हादसे में घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल बुलाया गया। अस्पताल पहुंचने पर पूजा को पता चला कि उनके पति की मौत हो चुकी है।
पूजा सिंह ने कहा कि शुरू में परिवार वालों ने उनसे सच्चाई छुपाई और बताया कि आलोक की मौत ट्रेन हादसे में हुई है। अंतिम संस्कार के बाद उन्हें बताया गया कि आलोक की हत्या की गई थी। पूजा ने कहा, “मेरी सारी खुशियां छीन ली गईं। जिसने मेरे पति को मारा है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” आलोक के पिता अनिल सिंह एनएसजी कमांडो हैं और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सुरक्षा में तैनात हैं। आलोक की बहन पूजा संदीप सिंह ने कहा कि उनका भाई शांत स्वभाव का था और किसी से झगड़ा नहीं करता था। उन्होंने कहा, “हमें समझ नहीं आ रहा कि कोई उसे चाकू क्यों मारेगा”।
परिवार की रिश्तेदार शीला सिंह ने बताया कि आलोक एमएससी डिग्रीधारी थे और बहुत समझदार इंसान थे। उन्होंने कहा, “किसी को इतना गुस्सा क्यों आया कि उसने हमारे बेटे की जान ले ली, यह समझ से बाहर है”। परिवार का आरोप है कि अगर समय पर इलाज मिलता तो आलोक की जान बच सकती थी। परिजनों का कहना है कि चाकू लगने के बाद आलोक को करीब आधे घंटे तक प्लेटफॉर्म पर बैठाकर रखा गया और वह लगभग एक घंटे तक जीवित थे।
परिवार ने सवाल उठाया कि स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर क्यों थी, ट्रेन में धारदार हथियार कैसे लाया गया और समय पर एम्बुलेंस क्यों नहीं पहुंची। रेलवे पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक दत्ता खुपेकर ने देरी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी तरह की प्रक्रिया के कारण देरी नहीं हुई। उनके अनुसार, ट्रैफिक की वजह से एम्बुलेंस 15-20 मिनट देर से पहुंची, फिर मरीज को एम्बुलेंस में शिफ्ट करने और अस्पताल ले जाने में समय लगा। रेलवे के मुताबिक, मालाड स्टेशन पर उतरते समय गेट पर झगड़ा हुआ और उसी दौरान आलोक सिंह पर हमला किया गया।

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