अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़
चेसिस नंबर बदल बेचते थे गाड़ियां, तीन चोरों से 16 लग्जरी कारें बरामद

नई दिल्ली। देश भर में वाहन चोरी करने वाले एक कुख्यात सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर क्राइम ब्रांच ने तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनकी निशानदेही पर 16 महंगी चोरी की कारें बरामद कीं गई हैं, जिनमें पांच सेल्टोस, एक होंडा वेन्यू, आठ टोयोटा फार्च्यूनर, एक हुंडई क्रेटा व एक महिंद्रा थार शामिल हैं। यह सिंडिकेट कार चोरी करने के अलावा लोन डिफाल्ट कार हासिल करने, चेसिस नंबर बदलने, टोटल-लाॅस कारों के चेसिस नंबर बदलने, नकली सेल लेटर व फर्जी बैंक एनओसी के आधार पर विभिन्न राज्यों के परिवहन विभाग में पंजीकरण करवा बेच देता था।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक पांच अगस्त को मौर्या एन्क्लेव थाने में एक व्यक्ति ने अपनी हुंडई क्रेटा कार चार मई की रात एपी ब्लाक, पीतमपुरा से चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शुरू में थाना पुलिस ही मामले की जांच करती रही बाद में पांच सितंबर को केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया। 24 दिसबर को एएसआइ प्रवीण सिंह को सूचना मिली कि जालंधर के रहने वाले एक रिसीवर ने कई चोरी के वाहन खरीदे हैं। उत्तमनगर से चोरी की हुंडई क्रेटा उसी के पास है।
एसीपी रमेश चंद्र लांबा व इंस्पेक्टर मनमीत की टीम ने 25 दिसंबर को जालंधर से दमनदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उसके परिसर की तलाशी में चार किआ सेल्टोस बरामद की गई जो दिल्ली से चोरी हुई थी। दमनदीप सिंह से पता चला कि उसने पीतमपुरा के रहने वाले अमनदीप के ज़रिए दिल्ली में नकली रजिस्ट्रेशन नंबर वाली कई चोरी की गाड़ियां बेचीं है।
ई एफआईआर की जांच के दौरान, कई चोरी के वाहन बरामद किए गए, इनमें दो टोयोटा फार्च्यूनर एसयूवी, जिन्हें दिल्ली में ग्राहकों को बेचा गया था, उनका पता लगाया गया। जांच से पता चला कि चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ की गई थी और वाहनों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर पंजीकरण कराया गया था।
पूछताछ में उसने बताया कि उसने कई लोगों को दमनदीप सिंह और उसके साथियों से मिलवाया और फर्जी तरीके से पंजीकृत चोरी के वाहनों की खरीद में मदद की। उसने साथियों के निर्देश पर चोरी के वाहनों को दिल्ली से जालंधर ले जाने में भी मदद की। उससे पूछताछ के बाद, अमनदीप सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर चार चोरी की टोयोटा फाॅर्च्यूनर गाड़ियां बरामद की गई।
सरगना, दमनदीप सिंह, साथियों के ज़रिए दिल्ली-एनसीआर से चोरी की गाड़ियां मंगवाता था। इन गाड़ियों को पंजाब ले जाया जाता था, जहां उनके असली चेसिस नंबरों के साथ छेड़छाड़ की जाती थी या टोटल-जास गाड़ियों के चेसिस नंबरों का इस्तेमाल करके उन्हें बदल दिया जाता था। बिक्री पत्र और बैंक एनओसी जैसे जाली दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
इन जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करके, गाड़ियों को धोखे से अलग-अलग राज्यों, मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और पंजाब में रजिस्टर करवाया जाता था, ताकि वे असली मालिक की लगें। अरविंद शर्मा ने जाली दस्तावेज का इंतज़ाम करके अवैध रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में मदद की, जबकि अमनदीप सिंह ने खरीदारों की पहचान करके, ट्रांसपोर्टेशन का तालमेल बिठाकर और धोखाधड़ी से रजिस्टर की गई गाड़ियों की दिल्ली और एनसीआर में डिलीवरी का इंतजाम करके बिचौलिए का काम किया।




