गाजियाबाद में हुए सामूहिक दुष्कर्म की सच्चाई ने उड़ाए यूपी पुलिस के होश, पीड़िता ही निकली ‘गुनहगार’

गाजियाबाद ब्यूरो। दो दिन पहले बुधवार को दिल्ली की महिला से गाजियाबाद में सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता का मामला पूरी तरह से फर्जी साबित हो चुका है। आरोपितों ने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की, लेकिन दो दिन के भीतर झूठी कहानी का भांडाफोड़ हो गया है। पुलिस ने इस मामले में महिला के तीन दोस्तों को गिरफ्तार किया है। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही महिला को भी गिरफ्तार किया जाएगा, जो अब तक खुद को पीड़िता बता रही थी। जबकि, उन पांचों के खिलाफ पुलिस को कोई सबूत नहीं मिले, जिनपर महिला अगवा कर दुष्कर्म करने का आरोप लगा रही थी। पुलिस ने पांचों को क्लीन चिट दे दी है। गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि दिल्ली की महिला से फर्जी दुष्कर्म की यह पूरी कहानी एक विवादित प्रापर्टी को हथियाने के लिए रची गई थी।
नर्स और उसके दोस्त आजाद ने निर्भया जैसे कांड की झूठी कहानी बनाई, उसे सच साबित करने के लिए कदम-कदम पर झूठ बोला गया, लेकिन मोबाइल फोन ने पूरी पोल खोल दी। पुलिस को जैसे ही पता चला कि नर्स दो दिन अपने दिल्ली के घर में ही थी, वैसे ही जांच की दिशा एकदम से बदल गई। नर्स के मोबाइल की कॉल डिटेल में आजाद का नंबर मिला। उसने 16 अक्तूबर की रात से 18 अक्तूबर की सुबह तक खुद को जंगल में बंधक बनाया, जबकि इस दौरान उसकी कई बार आजाद से बात हुई। बता दें कि, गाजियाबाद शहर के नंदग्राम इलाके में दिल्ली की 38 वर्षीय नर्स के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी होने का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया गया था। बताया गया था कि वह नंदग्राम में भाई के घर से उसके जन्मदिन समारोह में शामिल होकर दिल्ली अपने घर लौट रही थी। भाई ने आरोप लगाया था कि चार युवक बहन को 16 अक्तूबर की रात दस बजे स्कार्पियो गाड़ी में डाल जंगल में ले गए। वहां एक और ने मिलकर दुष्कर्म किया और उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी।

वैसे पुलिस को शक तो तभी हो गया था, जब 112 पर कॉल करने वाले राहगीर ने बताया कि उससे फोन करने के लिए एक युवक ने कहा था जो नर्स के पास पहले से मौजूद था। उस युवक के कहने पर ही उसने फोन किया। पुलिस के आते ही वह युवक भाग गया था। पुलिस उस युवक की तलाश में लग गई। जांच में पता चला कि वह कोई और नहीं, आजाद ही है।राष्ट्रीय महिला आयोग को पुलिस द्वारा सूचित किया गया था कि रिपोर्ट की गई घटना एक साजिश प्रतीत होती है, जिसकी पुष्टि 3 संदिग्धों- आज़ाद तहसीन, गौरव शरण और मोहम्मद अफज़ल के इकबालिया बयानों से होती है। महिला और उसके रिश्तेदारों द्वारा कई विरोधाभासी बयान दिए गए जिससे प्रामाणिकता पर संदेह पैदा हुआ। पुलिस ने कहा कि इस घटना की योजना 5 प्रारंभिक संदिग्धों को फंसाने की थी, जिनका महिला के साथ संपत्ति का विवाद था। मामला विचाराधीन, जांच चल रही है।
नर्स ने एमएमजी जिला अस्पताल में उपचार कराने से मना किया। मेरठ रेफर किया तो वहां जाने से इनकार किया। दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भेजने की जिद की। वहां वह पहले काम कर चुकी थी। इससे पुलिस को शक हुआ।नर्स के भाई ने कहा था कि बहन के घर न पहुंचने पर भांजे का फोन आया। पुलिस ने नर्स के बच्चों से जानकारी कराई तो पता चला कि वह उन्हें अपनी बहन के घर छोड़ गई थी। खुद भाई के जन्म दिन समारोह से जाने के बाद दिल्ली में अपने घर पर ही रही।नर्स ने झूठी कहानी बनाई, लेकिन इसकी जानकारी भाई को नहीं थी। उससे नर्स जैसे कहती गई, वह वैसा ही करता रहा। उसने ही रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि उसे साजिश के बारे में कोई जानकारी नहीं।
नर्स के भाई ने बताया कि नामजद आरोपियों के साथ बहन का दिल्ली के कबीरनगर में मकान का विवाद है। बहन ने शाहरुख और जावेद से मकान खरीदा था। दोनों भाई हैं। दोनों ने कब्जा नहीं छोड़ा है। मामला कोर्ट में है। शाहरुख और जावेद की मां ने मकान का सौदा दीनू से कर दिया। धौला, औरंगजेब, जावेद और शाहरुख के पड़ोसी हैं और विवाद में उनका साथ दे रहे हैं। पुलिस ने बताया कि मकान हड़पने के लिए जालसाजी की गई। पहले यह मकान आजाद ने समीना नाम की महिला से खरीदा हुआ दिखायाा। इसके फर्जी दस्तावेज बनाए। इसके बाद फर्जी तरीके से आजाद ने दीपक जोशी को पॉवर ऑफ अटॉर्नी कर दी। दीपक ने नर्स के नाम पॉवर ऑफ अटॉर्नी कर दी। नर्स ने मकान पर दावा कर शाहरुख और जावेद से इसे खाली करने के लिए कहा। वे कोर्ट चले गए। इस पर उन्हें और उनका साथ दे रहे युवकों पर सामूहिक दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराया गया ताकि वे जेल चले जाएं और मकान पर नर्स का कब्जा हो जाए।
ऐसे उठा रहस्य से पर्दा
नामजद पांचों युवकों की लोकेशन गाजियाबाद में ही नहीं मिली। वे अलग-अलग जगह पर थे।
3. जंगल में पांच ने दुष्कर्म किया, प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाली
मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं। रॉड की कहानी झूठी। लोहे का तार मिला था जो नर्स ने खुद रखा था।
4. बोरी में बंद करके 18 की सुबह आरोपी आश्रम रोड पर फेंक गए ताकि उसकी मौत हो जाए।
गिरफ्तार युवकों के साथ 18 की रात ही अल्टो कार से दिल्ली से आई थी नर्स। बोरी में आजाद ने बंद किया।




