इंदौर से आकर दिल्ली में चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

पुलिस ने घेरा तो पांचवीं मंजिल कूदा चोर, टूटी टांग

पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली पुलिस की पश्चिमी जिले की टीम ने तिलक नगर इलाके में हुई सेंधमारी की एक बड़ी गुत्थी को सुलझाते हुए मध्य प्रदेश के एक शातिर चोर गैंग का भंडाफोड़ किया है। यह गैंग ट्रेन से दिल्ली पहुंच कर घूम घूम कर वारदातों को अंजाम देते हैं।
पुलिस टीम ने गैंग के दो आरोपितों, सुरजीत सिंह (42) और कुंदन सिंह (25) को गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 25 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और घर तोड़ने के आधुनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। डीसीपी शरद भास्कर ने बताया कि एसएचओ विनीत पांडेय के नेतृत्व में टीम हेड कांस्टेबल राजबीर, दलजीत, कृष्ण, अरविंद ने मामले की जांच करते हुे 150 कैमरों की फुटेज खंगालकर उन्हें पहाड़गंज में ट्रैक कर छापा मारा। पुलिस ने पहले आरोपी सुरजीत को दबोचा, तो उसने अपने साथी कुंदन का पता बताया।
खुद को पुलिस से घिरा देख कुंदन सिंह ने पांचवीं मंजिल की खिड़की से नीचे छलांग लगा दी। इस कोशिश में वह बच तो गया, लेकिन ऊंचाई से गिरने के कारण उसकी बायीं टांग टूट गई, जिसके बाद उसे काबू कर लिया गया। पुलिस ने इनके पास से 2 सोने के हार, 2 चूड़ियां, मंगलसूत्र, महिला और पुरुष के सोने की चेन, अंगूठियां और कान की बालियों समेत भारी मात्रा में गहने बरामद किए हैं। आरोपित सुरजीत पर मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहले से 10 और कुंदन पर 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
जानकारी के अनुसार यह गिरोह बेहद पेशेवर तरीके से काम करता है। करीब एक माह पहले दोनों ट्रेन के जरिए मध्य प्रदेश से दिल्ली पहुंचा था। राजधानी में दाखिल होने के बाद ये अपराधी अलग-अलग होकर बंट गए थे ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें और अलग-अलग रिहायशी इलाकों में रेकी करने लगे। फिर उन घरों को निशाना बनाते और सेंधमारी करते जो या तो बंद होते थे या घर में कोई अकेला होता था।
साथ वारदात को अंजाम देने के बाद इलाका छोड़ देते थे, ताकि स्थानीय पुलिस इन्हें तलाश न सके। इन दिनों आरोपितों ने पहाड़गंज इलाके में एक मकान की पांचवीं मंजिल पर किराए का कमरा ले रखा था। पुलिस जांच में पता चला कि इन दोनों के कुछ सहयोगी सदस्य भी हैं, जो जिनका काम केवल चुराए हुए माल को सुरक्षित तरीके से शहर से बाहर ले जाना होता है।
वारदात के तुरंत बाद ये सदस्य सोना या नकदी लेकर अपने राज्य वापस निकल जाते हैं, ताकि यदि स्थानीय पुलिस आरोपितों को पकड़ भी ले, तो बरामदगी न हो सके। हालांकि, इस मामले में ये आरोपित पिछली चोरी का सामान अपने साथियों के जरिए बाहर नहीं भेज पाए थे, जिसके चलते भारी मात्रा में जेवरात पुलिस के हाथ लग गए। पुलिस अब इनसे पिछले एक माह में दिए वारदातों के बारे में पूछताछ कर रही है।

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