फतेहपुर में खनन माफियाओं का आतंक, ओवरलोड ट्रकों का कहर जारी

बेखौफ ओवरलोड ट्रक-डंपर भर रहे फर्राटे

फतेहपुर/उत्तर प्रदेश। किशनपुर थाना क्षेत्र का संगोलीपुर मड़ैयन घाट इन दिनों खनन माफियाओं का अड्डा बन चुका है। रात ढलते ही घाट पर मशीनों की गड़गड़ाहट गूंजने लगती है और कालिंदी नदी का सीना पोकलैंड व जेसीबी से बेरहमी से चीर दिया जाता है। नियम‑कानून, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश और प्रशासन की सख्ती—सब कुछ मानो यहां बेमानी हो चुका है।
ओवरलोड ट्रक-डंपरों का आतंक
दिन हो या रात, ओवरलोड ट्रैक्टर, ट्रक और डंपर बिना किसी डर के फर्राटे भरते हुए गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं। इन वाहनों का वजन इतना अधिक होता है कि सड़कें जगह-जगह टूटकर गड्ढों में बदल चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी रहस्य पैदा करती है।
नदी का सीना छलनी, खेतों का विनाश
जहां कभी कालिंदी नदी शांत बहती थी, आज वहां गहरे-गहरे खड्डे दिखाई देते हैं। अवैध खनन ने नदी की रेखा ही बदल दी है। इतना ही नहीं, खेतों में खड़ी फसलें ओवरलोड डंपरों के पहियों तले कुचली जा रही हैं। किसानों का दर्द साफ झलकता है— “हमारी फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।”
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
स्थानीय किसान विनीत गर्ग, ननकू कोटेदार, राजकुमार निषाद, प्रलाद निषाद सहित कई ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि खनन माफिया किसी न किसी संरक्षण में काम कर रहे हैं। उनका सवाल है— “जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है, तो प्रशासन आखिर चुप क्यों है?”
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
खनन का यह खेल किसी गुप्त ऑपरेशन की तरह नहीं, बल्कि खुलेआम चलता है। रात भर ट्रक-डंपर बालू से लदे निकलते रहते हैं, लेकिन न तो पुलिस की कार्रवाई दिखती है और न ही राजस्व विभाग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह चुप्पी किसी बड़े गठजोड़ की ओर इशारा करती है।
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर
कालिंदी नदी का अस्तित्व दांव पर है, किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और गांव की सड़कें टूट चुकी हैं। सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा और कब खनन माफियाओं के इस नेटवर्क पर नकेल कसेगा।

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