तिब्बत से आया दिल्ली फिर फर्जी पासपोर्ट पर कई देश घूमा, साइबर ठगों को लीक किए भारतीय लोगों की बैंक डिटेल

He came to Delhi from Tibet and then travelled to many countries on a fake passport, leaked bank details of Indian people to cyber thugs

नोएडा। उत्तर प्रदेश की नोएडा एसटीएफ यूनिट ने एक तिब्बती नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से दो पासपोर्ट, एक फर्जी वोटर आईडी कार्ड, एक पैन कार्ड, एक आधार कार्ड, दो एटीएम कार्ड, एक कंबोडियाई सिम कार्ड और दो मोबाइल फोन बरामद हुआ है। आरोपी को नोएडा एसटीएफ यूनिट के एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा के नेतृत्व में गठित टीम ने दिल्ली के द्वारका स्थित एलआईजी फ्लैट से बुधवार को दबोचा गया है। आरोपी चीनी और कंबोडियाई साइबर अपराधियों को भारतीय लोगों का बैंक का खाता उपलब्ध करवाता है। इन खातों में साइबर अपराधी भारतीय लोगों से ठगी की गई रकम को ट्रांसफर करवाते हैं।नोएडा एसटीएफ यूनिट के एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि कुछ दिनों से एसटीएफ नोएडा को विदेशी नागरिकों की ओर से फर्जी कागजात को तैयार करके भारतीय लोगों के दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट इत्यादि बनाने की सूचनाएं प्राप्त हो रही थी। इसी के आधार पर मंगलवार की रात निरीक्षक सचिन कुमार ने दिल्ली के द्वारका से दो लोगों को हिरासत में पूछताछ के लिए नोएडा एसटीएफ ऑफिस लाया गया। इन्होंने अपना नाम चंद्रा ठाकुर पुत्र रमेश ठाकुर और दीपक निराला पुत्र शिवराज बताया। एक व्यक्ति तथाकथित चंद्रा ठाकुर ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वह तिब्बत का रहने वाला है।
तिब्बत से भागकर आया था इंडिया
एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि जब वह 14 वर्ष का था, तब वह भागकर लासा तिब्बत आ गया। जहां से 50-60 लोगों के ग्रुप के साथ दुकला नेपाल आया और लगभग तीन महीने काठमांडू के रिफ्यूजी सेंटर में रहा। वहां से दिल्ली के बुद्धविहार रिफ्यूजी सेंटर आया। करीब एक महीने बाद वीर बिलिंग हिमाचल प्रदेश के स्कूल में पढ़ाई शुरू की और लगभग तीन वर्ष पढ़ाई करने के बाद दिल्ली भाग आया था। इसके बाद धर्मशाला और दिल्ली के विभिन्न रेस्टोरेंट में चार वर्ष तक काम किया। फिर वर्ष 2008 में मजनू का टीला दिल्ली में आकर रहने लगा। धीरे-धीरे न्यूरोड काठमांडू नेपाल से चायनीज इलेक्ट्रानिक सामान एवं अन्य चीजों को वहां से लाकर चोरी छिपे दिल्ली के मार्केट में बेचने लगा। धीरे-धीरे इसको चायनीज भाषा का अच्छा ज्ञान हो गया।
फर्जी पासपोर्ट बनवाकर की कई देशों की यात्रा
एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2010-11 में फेसबुक पर महिला से दोस्ती के चलते गंगटोक सिक्किम आ गया और एक होटल पर कुक का काम करने लगा। यहीं पर इसकी मुलाकात दार्जिलिंग में खाने का होटल चलाने वाले एक लड़के से मुलाकात हो गई और फिर वह दार्जिलिंग आकर रहने लगा। दार्जिलिंग में रहते हुए चंद्र ठाकुर के नाम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड बना लिया। चंद्र ठाकुर के नाम से वर्ष 2013 में भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिया। इसके बाद आरोपी छीन्जों थारचिंन ने चीन, मलेशिया, थाईलैंड, दुबई जैसे कई देशों की यात्राएं की। वर्ष 2021 में नेपाल यात्रा के दौरान काठमांडू में ली नाम के चीन के निवासी से मुलाकात हुई थी। ली ने उसको नेट बैंकिंग सहित भारतीय बैंक के करंट एकाउंट उपलब्ध कराने को कहा, जिसका प्रयोग विभिन्न प्रकार के गेंमिग ऐप, लॉगिन ऐप, ट्रेडिंग ऐप में किया जाना था।
आरोपी को हुई थी 6 महीने की जेल
एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि ली ने बसंत कुंज दिल्ली के फार्म हाउस में रह रहे आरोपी छीन्जों थारचिंन से संपर्क करवाया। इसके बाद आरोपी छीन्जों थारचिंन ने अपने पूर्व परिचित जॉर्डन से अकाउंट की व्यवस्था करने को कहा। जॉर्डन भारतीय बैंक अकाउंट इन्हें उपलब्ध कराने लगा और उसके बदले कैश लेने लगा। आरोपी ने एक भारतीय बैंक अकाउंट, चायनीज को उपलब्ध कराया गया था। इन अकाउंट में लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन होने के बाद खाता धारक ने दिल्ली के जीटीवी एंक्लेव थाने पर धारा 420/406/120बी के तहत 9 दिसंबर 2021 को केस दर्ज कराया था। इसमें आरोपी छीन्जों थारर्चिन (तिब्बती) जेल गया था और लगभग 9 महीने जेल में रहा था।
साइबर क्राइम में खातों का इस्तेमाल
एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा ने आगे बताया कि जॉर्डन इस केस में सह आरोपी है। जेल से छूटने के बाद आरोपी छीन्जों थारचिंन की मुलाकात द्वारका के रहने वाले नन्दू उर्फ नरेन्द्र यादव से हुई, जो पहले से ही चायनीज के संपर्क में था। ये उनको पैसा लेकर इंडियन अकाउंट उपलब्ध कराता था। आरोपी छीन्जों थारचिंन, नेपाल, श्रीलंका में बैठे चायनीज के संपर्क में आ गया। भारतीय व्यक्तियों के और फर्मों के बैंक खाते खरीद कर अपने परिचित विदेशी नागरिकों को उपलब्ध कराने लगा। इसका प्रयोग वो लोग साइबर क्राइम में कर रहे थे।
आरोपी छीन्जों थारचिंन ने वर्ष 2023 में चन्द्रा ठाकुर के नाम से बना पासपोर्ट खत्म होने पर वर्ष 2024 में दिल्ली के पते पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पुनः पासपोर्ट प्राप्त कर लिया गया। पूछताछ में लगभग 26 भारतीय बैंक अकाउंट प्रकाश में आए हैं, जिनके संबंध में गहन छानबीन की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी छीन्जों थारचिंन उको थाना सूरजपुर गौतमबुद्ध नगर में दाखिल किया गया। अग्रिम विधिक कार्यवाही स्थानीय पुलिस की ओर से की जा रही है।

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