परंपरा तोड़ कर जब महिला ट्रैक्टर के साथ खेत में उतरी तो हुआ काफी विरोध

रांची,(झारखंड)। शहर ही नहीं बल्कि गांव की महिलाएं भी अब रूढ़िवादी विचारधारा की दहलीज को पीछे छोड़ कर आगे बढ़ रही हैं। इसका अच्छा उदाहरण पेश किया है रांची जिले के चान्हो प्रखंड अंतर्गत करकट गांव की अंगनी उरांव ने। अंगनी उरांव पिछले कई वर्षों से खेती-बाड़ी का काम कर रही हैं। खेती-बाड़ी भी वैसी करती है कि पुरुषों को भी क्षेत्र में मात देती हैं। हाल ही में उन्होंने अपने नाम एक और उपलब्धि हासिल की है। परंपरागत रूप से ट्रैक्टर चलाने का काम शहर हो या गांव पुरुषों के जिम्मे में ही होता है लेकिन अंगनी उरांव ने पुरानी मान्यताओं को पीछे छोड़ते हुए ट्रैक्टर चलाना शुरु कर दिया है। आज वो कई एकड़ भूमि जोत चुकी है। करकट और आसपास के गांव में जब किसानों को खेत की जुताई करनी होती है, तब अंगनी उरांव को याद करते हैं। अंगनी उरांव समय पर पहुंचकर खेत की जुताई कर देती हैं और इनके हाथों में पैसे मिल जाते हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी अंगनी उरांव को अब जानने और पहचानने वाले कई लोग हो गए हैं। पहले कृषि कार्य और अब ट्रैक्टर चलाने की वजह से इनकी कमाई भी कई गुना बढ़ गई है जिससे घर की माली हालत में सुधार हुई है।

खास बात यह है कि इस महिला ने कभी अपने जीवन में साइकिल तक नहीं चलाई है। साइकिल और स्कूटी जिस महिला ने अभी तक नहीं चलाया है वह भारी-भरकम ट्रैक्टर चला रही है और कई एकड़ भूमि की जुताई बड़े आराम से कर रही हैं। प्रारंभ में जब उसने ट्रैक्टर चलाना शुरू किया, तो गांव-घर में ही काफी विरोध हुआ। आज अंगनी अपने गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे इलाके के लिए मिसाल बन चुकी हैं।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी यानी जेएसएलपीएस अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जेएसएलपीएस के प्रतिनिधि दीपक कुमार सिंह बताते हैं कि महिलाओं को पहले स्वयं सहायता समूह से जोड़ा जाता है उसके बाद योजनाओं का लाभ उन्हें दिया जाता है। इन्हीं सब योजनाओं में से एक योजना के तहत इन्हें ट्रैक्टर दिया गया है। यह ट्रैक्टर जीपीएस सुविधा से लैस है। जीपीएस लगा होने के कारण ट्रैक्टर का परिचालन प्रखंड से बाहर नहीं किया जा सकता है।

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