कैंसर पीड़ित नाबालिग को करना था रक्तदान, पांच युवकों ने तोड़ दिया रोजा

देहरादून,(उत्तराखंड)। पांच युवकों के सामने एक तरफ धर्म था, दूसरी तरफ मानवता। युवकों ने धर्म को छोड़ा और मानवता का साथ दिया। एक अलग ही मिशाल पेश की। पांच मुस्लिम युवक रोजा में थे। उनके सामने कैंसर से पीड़ित 14 वर्षीय लड़की को खून देने की बात सामने आई। इसके बाद युवकों ने रोजा तोड़ा। बच्ची को रक्तदान किया। युवकों का कहना है कि बच्ची की जान के आगे परंपरा को तोड़ने का फैसला लिया। दरअसल, रमजान के दौरान इंजेक्शन लगाने की अनुमति नहीं होती है। सूर्यास्त से पहले भोजन करने की इजाजत नहीं मिलती है। युवकों ने रक्तदान के जरिए मानवता की सेवा का फैसला लिया।

14 वर्षीय बच्ची अंकिता गोंड कैंसर से पीड़ित है। मंगलवार को बच्ची को खून की जरूरत थी। इसकी जानकारी शाहरुख मलिक को मिली। 25 वर्षीय शाहरुख मलिक अपने चार दोस्तों के साथ अस्पताल पहुंच कर रक्तदान किया। शाहरुख ने कहा कि हमें लगता है कि हमारा ‘रोजा’ ईश्वर ने स्वीकार कर लिया गया है। हमने किसी की जान बचाने की पूरी कोशिश की है। शाहरुख के साथ जीशान अली (26), आसिफ अली (24), सवेज अली (24) और साहिल अली (25) ने रक्तदान किया। अंकिता को दून के बाहरी इलाके डोईवाला के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें पांच यूनिट खून की जरूरत थी।
शाहरुख ने कहा कि उन्हें ब्लड की जरूरत के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट से पता चला। उन्होंने कहा कि हमने इस प्रकार का पोस्ट देखने के बाद तुरंत सोचा कि हमें मदद करनी चाहिए। उसने कहा कि मैं तुरंत कुछ अन्य दोस्तों के पास पहुंच। वे भी रक्त दान करने के लिए तैयार हो गए।शाहरुख डोईवाला में डेयरी की दुकान चलाने में अपने पिता की मदद करते हैं। वहीं, जीशान, आसिफ और सवेज प्लंबिंग से जुड़ा काम करते हैं। साहिल फर्नीचर पॉलिशिंग के पारिवारिक व्यवसाय में मदद करते हैं।

एक निजी कंपनी में काम करने वाले 39 वर्षीय अंकिता के पिता ब्यासमुनि गोंड ने कहा कि मैं इन अजनबियों का आभारी हूं जो मेरी बेटी की मदद के लिए आगे आए। बिहार के रहने वाले और पिछले 10 सालों से हरिद्वार में कार्यरत ब्यासमुनि गोंड ने कहा कि अंकिता ने हाल ही में कक्षा 8 की परीक्षा प्रथम स्थान से उत्तीर्ण की है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एक झटके के समान है, जब हमें अंकिता के बारे में करीब एक सप्ताह पहले ब्लड कैंसर का पता चला। पिता ने कहा कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन उसके इलाज के जरिए जरूरी है। इसलिए, अंकिता को अब अपना जीवन बचाने के लिए अधिक ब्लड की आवश्यकता है।

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