आईएसआई के जरिये पाकिस्तान से करता था हथियार तस्करी, नेपाल से पकड़े गए गैंगस्टर सलीम पिस्टल पर लगा मकोका

नई दिल्ली/एजेंसी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यमुनापार के कुख्यात गैंगस्टर व हथियार तस्कर सलीम उर्फ पिस्टल’ को पिछले महीने नेपाल से गिरफ्तार किया गया था। वह उत्तर भारत के तीन बड़े हथियार तस्करों में एक है। कई तरह के संगठित गिरोहों से इसके संबंध रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की मानें तो सलीम पिस्टल के सीधे संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और डी-कंपनी से है। पूर्वी दिल्ली का रहने वाला सलीम पिस्टल शुरुआत में वाहन चोरी और हथियारों के बल पर लूट जैसी वारदातों में शामिल था, बाद में वह बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी करने लगा। सलीम को 2018 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय उसके पास से 26 पिस्टल, 19 मैग्जीन और 800 कारतूस बरामद हुए थे।
ज्यादातर पिस्टल ग्लोक 17 की नकल थीं, जिन पर मेड इन चाइना’ के टैग लगे थे। जमानत पर छूटने के बाद वह देश से फरार हो गया था। जांच में पता चला था कि सलीम द्वारा मंगाए गए हथियार पाकिस्तान से नेपाल भेजे जाने वाले ट्रांसफार्मरों में छिपाए जाते थे।
ट्रांसफार्मरों के मोटे लोहे के ढांचे में हथियारों के पुर्जे रखे जाते थे ताकि हवाई अड्डे पर स्कैनर उन्हें पकड़ न सकें। इस काम में नेपाल एयरपोर्ट के कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत पाई गई थी। नेपाल पहुंचने के बाद हथियारों की सूचना सलीम के सहयोगियों हाशिम उर्फ बाबा गिरोह को दी जाती थी। फिर इन हथियारों को भारत नेपाल सीमा से दिल्ली लाया जाता था। हाशिम तिहाड़ जेल में बंद है।
मंडोली जेल से मोबाइल से अपना गिरोह चलाने के कारण उसे तिहाड़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया। यमुनापार के इस गैंग्सटर पर दिल्ली पर नकेल नहीं लगा पा रही है। सलीम पिस्टल का जाफराबाद स्थित चार मंजिला मकान किलेबंद वर्कशाप की तरह इस्तेमाल होता था। जिसमें सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा था और हथियारों की असेंबलिंग व मरम्मत का काम यहीं किया जाता था। बताया जाता है कुछ सालों से उसने पाकिस्तान सीमा पर अवैध फैक्ट्री लगा रखी थी। दिल्ली पुलिस ने अब सलीम पिस्टल पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) लगा दिया है।




