ईरान में 1988 की तरह फिर क्रूर नरसंहार! सैकड़ों लोगों को सामूहिक फांसी देने की तैयारी

ईरान में मानवाधिकार और स्वतंत्र विचारों का जनाजा

तेहरान। ईरान से आने वाली रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि खामेनेई का इस्लामिक शासन सैकड़ों लोगों को मौत की सजा देने की तैयारी तेज कर चुका है। ब्रिटिश अखबार द सन ने खुफिया सूत्रों के हवाले से खुलासा किया है कि ईरान में 1988 में किए गये नरसंहार को फिर से दोहराने की तैयारी की जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हजारों राजनीतिक कैदी, जिन्होंने देश की इस्लामिक शासन का विरोध किया था, या फिर ऐसे लोग, जिन्होंने महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाए थे, उन्हें फांसी पर टांगने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने फांसी की सजा में तेजी लाने का आदेश दे दिया है।
ब्रिटिश अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दिनों दो राजनीतिक कैदियों मेहदी हसनी, जिनकी उम्र 48 साल थी और बेहरूज एहसानी, जिनकी उम्र 70 साल थी, उन्हें फांसी की सजा दी जा चुकी है। ये दोनों राजनीतिक कैदी थी और झूठे आरोपों में इन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया है। इन्होंने कोई शारीरिक जुर्म नहीं किया था और ये दोनों देश की शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले नेता था। द सन ने अपनी रिपोर्ट में मेहदी हसनी के तीन बच्चों से बात करते हुए लिखा है कि जेल से उनके पिता ने एक दर्दनाक संदेश भेजा था, जिसमें उन्होंने देश की मुल्ला शासन की कड़े शब्दों में आलोचना की थी। जबकि बेहरूज एहसानी ने कहा था कि वो देश के लोगों की आजादी और उनके हक के लिए फांसी पर लटकने के लिए तैयार हैं।ईरान में फिर से नरसंहार की तैयारी
ईरान की इस्लामिक सरकार विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए क्रूरतम उपायों को आजमाती है। लोगों को डराने के लिए और किसी भी विरोध को कुचलने के लिए सार्वजनिक तौर पर लोगों को फांसी दी जाती है। 1988 में हजारों लोगों को सार्वजनिक तौर पर क्रेन के सहारे फांसी पर लटका दिया गया था। उस वर्ष इराक के साथ युद्धविराम स्वीकार करने के बाद भी इस्लामिक शासन उथल-पुथल में था और सरकार को लग रहा था कि विरोध तेज हो सकता है। उस वक्त भी सरकार के मुखिया अयातुल्ला खामेनेई ही थे और अभी भी शासन उन्हीं के हाथों में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में लोकतंत्र की स्थापना करने की कोशिश करने वाली विपक्षी पार्टी पीपुल्स मोजाहिदीन संगठन के नेताओं के खिलाफ लगातार मौत की सजा का ऐलान किया जा रहा है। इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के मुखपत्र माने जाने वाले सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने इस महीने 1998 के अमानवीय नरसंहार को दोहराने का सार्वजनिक आह्वान किया था।
इजरायल से युद्ध के बाद ईरान में एक बार फिर से सरकार अस्थिर है। इजरायली हमलों में देश को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी जेल में पिछले 25 सालों से बंद राजनीतिक कैदी सईद मसूरी ने हाथ से एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आगाह किया है कि “1988 के नरसंहार को दोहराया जा रहा है, बस भाषा और तरीका बदला है।” उन्हें हाल ही में सोलिटरी कन्फाइनमेंट में डालकर कुख्यात जाहेदान जेल भेज दिया गया। ब्रिटिश राजनेताओं और प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने ब्रिटिश सरकार से इस तरह के अत्याचार को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
ईरान के मौजूदा हालातों और भारी संख्या में राजनीतिक कैदियों को फांसी देने की कोशिश को लेकर रिपोर्ट सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने इसका विरोध तेज कर दिय है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि दुनिया इस मामले को लेकर चुप नहीं रह सकती है। NCRIE की प्रतिनिधि दौलत नवरोजी ने कहा कि ‘जेलों में क्रूर अत्याचार राजनीतिक कैदियों के साथ किए जाते हैं। उन्हें बेल्ट से पीटा जाता है, बस जिंदा रहने लायक खाना दिया जाता है।’ NCRIE की अध्यक्ष मरियम रजवी ने तत्काल यूनाइटेड नेशंस से दखल देने की मांग की है और अपील की है, कि तत्काल खामेनेई शासन के खिलाफ ठोस और असरदार कार्रवाई की जाए ताकि राजनीतिक कैदियों की जान बच सके। उन्होंने कहा कि “यह फांसी और क्रूरता के दम पर खड़ा शासन अब अपने अंतिम चरण में है और ये क्रूरता सिर्फ जनता के आक्रोश को और भड़काएगी।”
ईरान की सरकार ने पिछले दिनों जितने भी राजनीतिक कैदियों को फांसी पर चढ़ाया है, उनके शवों को उनके परिवार को नहीं सौंपा है। उन शवों को चुपचाप किसी अज्ञात जगह पर दफना दिया जाता है। मेहदी हसनी की बेटी ने एक मार्मिक वीडियो संदेश में द सन को बताया है कि उन्हें अपने पिता की फांसी के बारे में बताया भी नहीं गया। उन्होंने कहा कि “मैंने बहुत कोशिश की, बहुत उम्मीद थी… लेकिन अब तक यकीन नहीं हो रहा कि क्या हुआ।” आपको बता दें कि ईरान में पिछले साल 1000 लोगों को फांसी पर चढ़ाया गया था। जबकि 2023 में 834 लोगों को फांसी पर लटका दिया गया था।

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