रास्ते में मिले बेघर, बनीं उनकी मां, रतन टाटा से मिली प्रेरणा… हरियाणा की गुरु मां नाज पटेल की कहानी

Met a homeless person on the way, became his mother, got inspiration from Ratan Tata... Story of Haryana's Guru Maa Naaz Patel

यमुनानगर/हरियाणा। जीवन में हर कोई कुछ खोता है, कुछ पाता है, लेकिन बहुत कम लोग होते हैं जो दूसरों की जिंदगी संवारने के लिए अपने सपनों का त्याग करते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है गुरु मां नाज पटेल की, जिन्होंने 17 साल की उम्र में समाज सेवा का संकल्प लिया और आज 300 से ज्यादा बेघरों को सहारा देकर उनकी तक़दीर बदल दी। नाज पटेल का यह सफर अचानक शुरू नहीं हुआ। एक दिन उनके पड़ोस में रहने वाले बीमार अंकल की भूख से मौत हो गई, क्योंकि उनके लिए खाना पहुंचाने की जिम्मेदारी नाज की थी, और वह कुछ दिनों के लिए अपनी नानी के घर गई हुई थीं। जब उन्हें यह खबर मिली, तो उन्हें गहरा धक्का लगा और तभी उन्होंने तय किया कि वे जरूरतमंदों की सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बनाएंगी।
मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली गुरु मां नाज पटेल ने यमुनानगर के ताजेवाला गांव में ‘अवेस्ता फाउंडेशन’ नाम से एक आश्रम स्थापित किया। यहां वे बेसहारा, बीमार और दिव्यांग लोगों की सेवा कर रही हैं। अब तक वे 300 से ज्यादा बेघरों का इलाज कराकर उन्हें उनके घर पहुंचा चुकी हैं।
गुरु मां बताती हैं कि बचपन से ही वे टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा से बहुत प्रभावित रही हैं। उन्होंने देखा कि किस तरह रतन टाटा अपने मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाते हैं। इसी सोच ने उन्हें भी प्रेरित किया कि वे अपनी जिंदगी जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित करें। गुरु मां नाज पटेल अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं, लेकिन अब उनके माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने इरादे कमजोर नहीं होने दिए। धीरे-धीरे लोग उनकी सेवा भावना से जुड़ने लगे और उनका मिशन आगे बढ़ता गया। आर्थिक चुनौतियां, लेकिन सेवा जारी हालांकि, अवेस्ता फाउंडेशन आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है, फिर भी लोगों के सहयोग और ईश्वर की कृपा से यह आश्रम सुचारू रूप से चल रहा है। गुरु मां का मानना है कि समाज सेवा के लिए सिर्फ इच्छाशक्ति चाहिए, संसाधन अपने आप जुटते चले जाते हैं।

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