सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता : श्याम सुन्दर चैहान

देश हित में जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी: श्याम सुन्दर चैहान

नई दिल्ली। भारत देश की आम जनता की आर्थिक एवं कानूनी समस्याओं के समाधान एवं सुझाव हेतु भारत सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रायसिना रोड स्थिति प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में देश के चुनिंदा समाज सेवियों श्री श्याम सुंदर चैहान (वरिष्ठ भाजपा नेता, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश), पंडित अशोक भारतीय (राष्ट्रीय संयोजक विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा गाजियाबाद), श्री ओम प्रकाश सिंह (मुख्य नायक मजिस्ट्रेट सेवानिवृत्ति,आगरा), श्री राजेंद्र प्रसाद जैसवार (सी.ए.ओ.(सेवानिवृत्त), टाटा कैंसर हॉस्पिटल, वाराणसी, उत्तर प्रदेश), श्री प्रसाद पुरुषोत्तम पाखले वरिष्ठ समाजसेवी एवं (राष्ट्रीय अध्यक्ष बुनकर महासंघ, महाराष्ट्र ) जैसे समाजसेवकों ने आर्थिक एवं कानूनी सहायता के लिए पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। पत्रकार वार्ता में देश की बढ़ती जनसंख्या पर गंभीर चिंतन व्यक्त करते हुए देश हित में अपराधों पर नियंत्रण कानून व्यवस्था मे सुधार एवं सामाजिक संतुलन कायम रखने के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून तुरंत लागू करने की मांग की गई तथा सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था में सुधार करके उनके अनेकों बार निर्वाचित होने पर अनेको बार की पेंशन न देकर केवल एक बार ही पेंशन देने की मांग की गई एवं त्वरित न्याय व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई।
वरिष्ठ भाजपा नेता श्री श्याम सुन्दर चैहान ने आज घोषणा की कि उन्होंने आम जनता की आर्थिक और कानूनी समस्याओं के समाधान में मदद करने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाना और उन्हें अपने अधिकारों और अवसरों का उपयोग करने के लिए सही जानकारी और सहायता प्रदान करना है। भारत में वर्तमान समय में कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जो समाज और विकास को प्रभावित कर रहे हैं। हमारे देश की ताकत इसकी आम जनता है,वे नागरिक जो अपने परिवारों और समाज के लिए हर दिन नई चुनौतियों का सामना करते हैं। लेकिन आर्थिक और कानूनी बाधाएं अक्सर उनके जीवन में बड़ी मुश्किलें पैदा करती हैं। समाज में आय और संसाधनों का असमान वितरण गरीबी को बढ़ावा देता है। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है कि ऐसी समस्याओं के व्यावहारिक और सुलभ समाधान प्रस्तुत करना, जो हर नागरिक के लिए उपलब्ध और प्रभावी हों। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। जातिवाद, लिंगभेद, और धार्मिक तनाव जैसी समस्याएँ समाज में विभाजन पैदा करती हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी एक बड़ी समस्या है। कौशल विकास और रोजगार सृजन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कई नागरिकों को वित्तीय अनिश्चितताओं, ऋणों के भार और कानूनी विवादों से जूझते देखा गया है। इनसे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है, बल्कि उनके मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी गहरी छाया पड़ती है। इसे बदलना अब समय की मांग है। यद्यपि वर्तमान भारत में कई बदलावों की आवश्यकता है, फिर भी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनसे तुरन्त निपटना जरूरी है।

सभी वक्ताओं ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली में भी सुधार करने की मांग की। इस अवसर पर वक्ताओं ने सरल ऋण व्यवस्था और रोजगार के अवसरों को सुलभ बनाने की मांग की तथा इसे लागू करने के लिए सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के सहयोग से कम ब्याज पर ऋण देने की योजना बनाने की भी मांग की। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सुलभ और सरल बनाने पर भी चर्चा की गई, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को समान रूप से लाभ मिल सके। ऋण और रोजगार योजनाओं की जानकारी देने के लिए सार्वजनिक अभियान चलाने एवं समस्याओं को हल करने के लिए हेल्पलाइन और सहायता केंद्र की अधिक से अधिक स्थापना करने की बात भी रखी। जिससे लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था में सुधार करके अनेको बार की पेंशन न देकर केवल एक बार ही पेंशन देने की मांग की गई। जिससे सांसदों और विधायकों की पेंशन के सरकारी खजाने पर भारी दबाव को रोका जा सके। आम नागरिकों की तुलना में सांसदों और विधायकों को अधिक लाभ मिलना असंतुलन पैदा करता है। इसके अतरिक्ति जनसंख्या नियंत्रण कानून पर कठोर निर्णय लेने की मांग की क्योंकि जनसंख्या नियंत्रण कानून हमारे देश हित व विकास के लिए महत्वपूर्ण है जनसंख्या वृद्धि के कारण संसाधनों का उपयोग असंतुलित हो गया है।बढ़ती आबादी का असर कृषि योग्य भूमि जल वनो खनिजों जैसे प्राकृतिक साधनों पर सीधे पड़ रहा है शहरीकरण की तीव्रता बढ़ने से पर्यावरण क्षति और प्रदूषण की समस्याएं सामने आ रही है रोजगार के अवसर सीमित होने कारण बेरोजगारी की दर में वृद्धि हो रही है कम जनसंख्या का मतलब प्प्राकृतिक संसाधनों पर कम दबाव होगा जनसंख्या नियंत्रण कानून अति आवश्यक है यह कानून केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है इसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए ऐसी मांग मंच से की गई महिलाओं को सशक्त करके राष्ट्र को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम करने की अपील की गई। प्रेस वार्ता अपराह्न 3 बजे से 6 बजे तक चली तथा सभी वक्ताओं ने अपने वक्तव्य से देश में सुधारात्मक कानून बनाने की मांग की।

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