अब काशी में रंगभरी एकादशी का इंतजार, पहली बार गौना बारात में बाबा-गौरा की डोली उठाएंगे नागा साधु

Now Kashi is waiting for Rangbhari Ekadashi, for the first time Naga Sadhus will carry Baba-Gaura's palanquin in the Gauna procession

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। काशी में रंगभरी एकादशी (10 मार्च) के दिन बाबा विश्वनाथ की गौना बारात के अनूठे उत्सव की तैयारियों ने जोर पकड़ा है। पहली बार बाबा की डोली महाकुंभसे काशी आए नागा साधु अपने कंधों पर उठाएंगे। उस दिन रजत सिंहासन पर सवार होकर वावा विश्वनाथ माता पार्वती और प्रथमेश संग नागा साधुओं के कंधे पर काशी की गलियों में निकलेंगे तो शंखनाद और डमरूओं के निनाद के बीच काशीवासी बाबा संग गुलाल की होली खेलेंगे। इसी के साथ काशी में पांच दिनी रंगोत्सव शुरू हो जाएगा।महाशिवरात्रि पर महादेव और महामाया के विवाह उपरांत रंगभरी एकादशी पर भगवान शंकर माता पार्वती का गौना कराते हैं। यह परंपरा सदियों से निरंतर निभाई जा रही है। मान्यता है कि इस दिन बाबा स्वयं भक्तों के संग होली खेलते हैं। विवाह उत्सव से पहले बाबा को हल्दी-तेल की रस्म के लोकाचार में काशीवासियों के साथ ही पहली बार शामिल हुए नागा साधु अब निरंजनी अखाड़े के संत दिगंबर खुशहाल भारती की अगुआई में गौना बारात का हिस्सा बनेंगे।
गौना के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत का टेढीनीम स्थित आवास चार दिनों के लिए माता गौरा के मायके में तब्दील होगा। गौना से पहले 7 मार्च को गीत गवना, 8 मार्च को गौरा का तेल-हल्दी होगा। 9 मार्च को बाबा का ससुराल आगमन होगा। ससुराल आने के मौके पर 11 ब्राह्मणों द्वारा स्वतिवाचन, वैदिक घनपाठ और मंत्रों से बाबा की आराधना कर उन्हें रजत सिंहासन पर विराजमान कराया जाएगा। 10 मार्च की शाम बाबा की पालकी उठने से पहले सगुन गीतों के बीच भभूत की होली खेली जाएगी।
बाबा इस बार अपने गौने की बारात में राजसी पगड़ी और मेवाड़ी परिधान धारण करेंगे। यह परिधान नागा साधुओं की ओर से अर्पित किया गया है। माता पार्वती गुलाबी बनारसी साड़ी में दर्शन देंगी। बाबा की आंखों में लगाने के लिए काजल विश्वनाथ मंदिर के खप्पर से तो गौरा के लिए सिंदूर पंरपरानुसार अन्नपूर्णा मंदिर के मुख्य विग्रह से लाया जाएगा। रंगभरी एकादशी के दिन मुख्य अनुष्ठान की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में होगी। पंचगव्य से स्नान, षोडशोपचार पूजन और रुद्राभिषेक के बाद बाबा और मां पार्वती का श्रृंगार आरंभ होगा। गौना के लिए कई क्विंटल खास गुलाल मंगाया गया है।
रंगभरी एकादशी के अगले दिन यानी 11 मार्च को भोले के भक्त महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिताओं से निकली भस्म से होली खेलेंगे। महाकुंभ के के बाद काशी आए नागा साधुओं ने महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ के विवाह के दिन राजसी यात्रा निकाल सनातन का वैभव दिखाया था। अब नागा साधु पंचक्रोशी परिक्रमा करेंगे। 75 किलोमीटर की पंचक्रोशी यात्रा 5 मार्च से शुरू होकर पांच दिनों में पूरी होगी। पंचक्रोशी यात्रा में शामिल होने वाले पांच सौ से ज्यादा नागा साधु शिवाला स्थित महानिर्वाणी अखाड़े से 5 मार्च की सुबह निकलेंगे। मणिकर्णिका तीर्थ पर कूपजल से संकल्प लेकर यात्रा प्रारंभ होगी।

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