सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसे खुपसदेव धाम की बदलेगी तस्वीर, सीएम मोहन यादव ने की सड़क और विकास की घोषणा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के सतपुड़ा जंगलों में स्थित प्राचीन खुपसदेव मंदिर क्षेत्र को विकसित करने और वहां सड़क बनवाने का ऐलान किया है। आदिवासी आस्था और परंपराओं से जुड़े इस स्थल पर कभी बिना ब्याज रुपया और चांदी देने की परंपरा थी।

बड़वानी,मध्य प्रदेश। सतपुड़ा की घनी पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित खुपसदेव धाम को अब नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के अजगरिया गांव के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित खुपसदेव मंदिर क्षेत्र के विकास और वहां तक सड़क निर्माण की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रविवार देर शाम शिवपंथ समुदाय के नशामुक्ति कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।
खुपसदेव धाम आदिवासी समाज की आस्था, लोकपरंपराओं और सामुदायिक सहयोग की अनूठी विरासत से जुड़ा स्थल माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जरूरतमंद परिवार यहां से विवाह और अन्य पारिवारिक आयोजनों के लिए रुपये या चांदी बिना ब्याज के लेते थे और फसल आने के बाद उसे वापस कर देते थे। इस परंपरा के कारण खुपसदेव को स्थानीय स्तर पर ‘वाणिया देव’ के नाम से भी जाना जाता है।
शोधकर्ता डॉ. सौरभ मारू के अनुसार, घने जंगलों के बीच पहाड़ी की चोटी पर पांच पवित्र पिंडियां स्थापित हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से खुपसदेव के रूप में पूजा जाता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के आदिवासी समुदायों में इस स्थल के प्रति गहरी आस्था है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
स्थानीय लोककथा के अनुसार, इस क्षेत्र में ऋषि-मुनि तपस्या करते थे और उन्हें परेशान करने वाली एक दुष्ट शक्ति को खुपसदेव ने जमीन में दफना दिया था। स्थानीय शब्द ‘खुपसने’ यानी जमीन में गाड़ने या दफन करने से खुपसदेव नाम की उत्पत्ति जोड़ी जाती है। क्षेत्र में प्राकृतिक जलस्रोत और पहाड़ी पर बना सरोवर भी स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
खुपसदेव क्षेत्र धार्मिक महत्व के साथ प्राकृतिक संपदा के लिए भी जाना जाता है। शोध के अनुसार यहां 40 से अधिक प्रकार की वन भाजियां पाई जाती हैं, जो स्थानीय पोषण और पारंपरिक ज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। पहाड़ी पर ताजुद्दीन बाबा यानी चांदन बाबा की दरगाह भी है, जिससे यह क्षेत्र विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और लोकपरंपराओं के संगम के रूप में दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में बारेली भाषा के संरक्षण और विकास के लिए दस्तावेजों के संरक्षण एवं शोध की बात कही। उन्होंने बड़वानी में वन औषधियों के संरक्षण और अनुसंधान के लिए वन औषधि शोध संस्थान स्थापित करने की घोषणा भी की।
खुपसदेव धाम को पहचान दिलाने में बड़वानी के पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ला की पहल का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने वन अधिकारियों और क्षेत्रीय लोगों के साथ पहाड़ी क्षेत्र का दौरा कर पौधारोपण किया था। वहीं, डॉ. सौरभ मारू के शोध और स्थानीय समुदाय की सक्रियता से इस स्थल के धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व को सामने लाने में मदद मिली।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब खुपसदेव धाम तक सड़क निर्माण, स्थल के संरक्षण और सुव्यवस्थित विकास की उम्मीद बढ़ गई है। इससे यह क्षेत्र आदिवासी विरासत, लोककथाओं और सतपुड़ा की प्राकृतिक संपदा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल, अनुसूचित जनजाति वर्ग आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी, पानसेमल विधायक श्याम बरडे, शिवपंथ के कालू सिंह महाराज, सुमली माताजी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।




