टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में मकोका के तहत कार्रवाई, संगठित गिरोह के नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन की जांच तेज
फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने अब इस मामले में आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की गंभीर धाराएं लगाई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है।

मुंबई,एजेंसी। अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई की है। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक, मामले में कथित संगठित अपराध, वित्तीय लाभ, गिरोह के वर्चस्व और हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फायरिंग की घटना के पीछे केवल अभिनेता को डराने का उद्देश्य था या इसके जरिए मुंबई में किसी आपराधिक गिरोह का दबदबा स्थापित करने की कोशिश की गई थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, पुलिस आरोपियों के बीच संपर्क, कथित साजिश, वारदात के लिए संसाधनों की व्यवस्था, डिजिटल साक्ष्यों और विदेश में बैठे कथित गिरोह संचालकों से बातचीत की कड़ियों को जोड़ रही है। पुलिस का मानना है कि मामले में सामने आए तथ्यों और आरोपियों की कथित आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए संगठित अपराध के पहलू की गहन जांच जरूरी है।
डीसीपी राज तिलक रोशन के मुताबिक, विशेष मकोका अदालत में 11 आरोपियों में से पांच को पेश किए जाने की जानकारी दी गई थी। पुलिस का कहना है कि अब तक छह आरोपियों का आपराधिक इतिहास सामने आया है। इससे पहले 19 अक्टूबर को सांताक्रुज पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता और आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब जांच में मकोका के प्रावधानों के तहत कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान वसूली, दहशत फैलाने और कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का प्रभाव बढ़ाने जैसे संभावित उद्देश्यों की जानकारी सामने आई है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या कुछ युवकों को आर्थिक लाभ और विदेश में बसाने का लालच देकर गंभीर अपराधों में शामिल किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में आठ हरियाणा के सोनीपत से बताए गए हैं।
पुलिस के दावे के अनुसार, गिरोह का संचालन अमेरिका से किए जाने की आशंका है। जांच में अनिल पंडित नामक व्यक्ति का नाम कथित हैंडलर के रूप में सामने आया है, जिसे पुलिस ने फरार आरोपी बताया है। पुलिस का दावा है कि उसके संबंध लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े हैं और उसके खिलाफ हरियाणा तथा पंजाब में गंभीर आपराधिक मामलों में तीन आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियां रणदीप मलिक, हरमन संधू और अन्य कथित गिरोह सदस्यों के साथ उसके संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।
मकोका के तहत कार्रवाई के बाद पुलिस का ध्यान कथित गिरोह के वित्तीय नेटवर्क, युवकों की भर्ती, हथियारों की खरीद और तस्करी तथा विदेश से भारत में आपराधिक गतिविधियों के संचालन के तरीकों पर केंद्रित है। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि फायरिंग के लिए हथियार कहां से जुटाए गए, आरोपियों को किसने निर्देश दिए और वारदात के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था किसने की।
मुंबई पुलिस इस मामले को केवल फायरिंग की घटना तक सीमित न रखते हुए कथित संगठित अपराध के व्यापक नेटवर्क के संदर्भ में जांच रही है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों की भूमिका, आपसी संपर्क और संभावित वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है। मामले में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




