गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर सहित यूपी के 688 पुलिसकर्मी पदोन्नति के अयोग्य

गाजियाबाद ब्यूरो। पदोन्नति की दौड़ में शामिल 688 पुलिसकर्मियों को अयोग्य करार दिया गया है। इसकी वजह उनके खिलाफ पहले चल रही जांच और दर्ज आपराधिक मुकदमे हैं। इनमें गाजियाबाद के 23, गौतमबुद्ध नगर के 22 और हापुड़ के 12 पुलिसकर्मी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक ने सभी पुलिस कमिश्नर और जिले के कप्तानों को दागी पुलिसकर्मियों की पदोन्नति रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को दागी 620 पुलिसकर्मियों की सूची भी भेज दी गई है, बाकी की सूची शीघ्र भेजी जाएगी।

यूपी पुलिस के 2011 बैच के आरक्षी और मुख्य आरक्षी लंबे समय से अपने प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे। निकाय चुनाव समाप्त होने के बाद प्रदेश सरकार ने इनके प्रमोशन की अनुमति दी तो पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने इनकी सूची जारी कर दी। इसके साथ ही बोर्ड ने अयोग्य पुलिसकर्मियों की भी एक सूची जारी की है। इस सूची में वह पुलिसकर्मी हैं जिन पर विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। ऐसे में दागी पुलिसकर्मियों का प्रमोशन रुक गया है।
जिला और अयोग्य पुलिस कर्मियों की संख्या की सूची

अयोग्य कर्मियों की सूची में लखनऊ से 31, प्रयागराज से 12, मेरठ से 24, कानपुर से 18, गोरखपुर के आठ, बागपत के 14, बुलंदशहर से 18, आगरा के 17, बरेली से 19, मुजफ्फरनगर से 12, शामली के सात, सहारनपुर से 24, मुरादाबाद के 26 और अलीगढ़ से 10 पुलिस को शामिल किया गया है।

इन पुलिसकर्मियों पर दर्ज था मुकदमा

बता दें कि गाजियाबाद में तैनात पुलिसकर्मी श्याम सिंह की हिरासत से आरोपी फरार हो गया था। इसको लेकर कवि नगर थाने में वर्ष 2011 में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में जिला अदालत ने उन्हें दोषी पाया था और सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट इलाहबाद में अपील की है।

वहीं गौतमबुद्ध नगर में तैनात पुलिसकर्मी दिनेश तिवारी के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें न्यायालय स्पेशल सीजेएम आगरा ने इन्हें दोषी पाया और एक साल की कारावास की सजा भी सुनाई। इस कारण बोर्ड ने इन्हें पदोन्नति के लिए अनुपयुक्त माना है।

इसके अलावा हापुड़ में तैनात पुलिसकर्मी हरीश कुमार की सत्यनिष्ठा एक मामले में अप्रमाणित मिली थी। इस कारण उन्हें प्रमोशन के लिए अनुपयुक्त माना गया है।

लखनऊ में भी जीआरपी में तैनात रहे अजीत प्रताप सिंह को 31 अगस्त 2010 से 17 अगस्त 2022 तक सेवा में न रहने और संतोषजनक सेवा न देने पर प्रमोशन के लिए अयोग्य माना गया।

वहीं प्रयागराज में तैनाती के दौरान विजय प्रकाश राम को एससी-एसटी एक्ट के तहत थाना मारकुंडी जिला चित्रकूट में न्यायालय द्वारा तीन वर्ष साधारण कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इसलिए प्रमोशन के लिए अयोग्य माना गया।

साथ ही मेरठ में तैनात राहुल सिंह को विगत 20 जनवरी 2017 को न्यायालय ने अपराध में दोषी पाया। वह अभी जेल में बंद है। इसलिए प्रमोशन के लिए अयोग्य माना गया है।

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