सीमापुरी विधानसभा सीट पर ‘नए-पुराने’ कांग्रेसियों की टक्कर से दिलचस्प हुआ मुकाबला

The contest between the 'new and old' Congressmen has made the Seemapuri assembly seat interesting

  • सीमापुरी में कांग्रेस से जुड़े तीन उम्मीदवारों का मुकाबला
  • कुमारी रिंकू कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गई
  • इस क्षेत्र में एससी वोटर्स की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है

नई दिल्ली। सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला काफी रोचक हो गया है। इस सीट पर चुनाव लड़ रहे तीनों उम्मीदवारों का संबंध कांग्रेस से है। इनमें बीजेपी और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार, कांग्रेस से ही पाला बदलकर आए हैं। वीर सिंह धिंगान तो सीमापुरी से कांग्रेस के तीन बार विधायक रहे हैं, लेकिन इस बार वे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं। इसी तरह से बीजेपी की कुमारी रिंकू कांग्रेस के टिकट पर निगम पार्षद रही हैं। धिंगान के पाला बदलने के बाद कांग्रेस ने यहां से राजेश लिलोठिया को उम्मीदवार बनाया है। लिलोठिया इससे पहले पटेल नगर सीट से विधायक रहे हैं।सीमापुरी विधानसभा एरिया के तहत आने वाली मुख्य कॉलोनियों में नंद नगरी, जीटीबी एनक्लेव, सुंदर नगरी, दिलशाद कॉलोनी, दिलशाद गार्डन, खेड़ा गांव, जगतपुरी एक्सटेंशन, जीटीबी हॉस्पिटल परिसर, जनता फ्लैट, जीटीबी एनक्लेव, ताहिरपुर गांव, नई सीमापुरी, कई झुग्गी बस्तियों के अलावा आनंद ग्राम और गांधी ग्राम (कुष्ठ आश्रम) सहित कई अन्य कॉलोनियां शामिल हैं। सीमापुरी विधानसभा एरिया में सबसे अधिक 57,667 वोटर्स 39-40 साल की उम्र वाले हैं। इसके अलावा 40-49 साल के बीच वाले वोटर्स की संख्या 43,552 है। इस विधानसभा में 20-29 साल के युवा वोटर्स की संख्या भी 41,246 है। वहीं 80 साल या उससे अधिक उम्र वाले वोटर्स की संख्या 1992 है।
सीमापुरी विधानसभा में मुख्य रूप से सीमापुरी, सुंदर नगरी और नंद नगरी जैसी पुनर्वास कॉलोनियों के साथ साथ कई झुग्गी बस्तियां भी आती हैं। विधानसभा का एक बड़ा हिस्सा यूपी से सटा हुआ है। सीमापुरी बॉर्डर से लेकर हर्ष विहार बॉर्डर तक का हिस्सा यूपी से सटा हुआ है। इन कॉलोनियों की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों में अतिक्रमण है, जिससे हालात खराब हैं। यहां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी, बढ़ता क्राइम, नशीले पदार्थ की बिक्री, पीने के पानी की दिक्कत और गरीबों का राशन कार्ड न बन पाना जैसे कई मुद्दे हैं।
रिजर्व सीट होने के कारण यहां एससी वोटर्स की संख्या सबसे अधिक है। उसमें भी लगभग 40,000 वोटर्स अकेले जाटव समाज के हैं। वहीं वाल्मिकी समाज के वोटर्स की संख्या भी 20-22 हजार के करीब है। यहां मुस्लिम वोटर्स की संख्या भी 20-22 हजार के करीब है। किसी भी उम्मीदवार की जीत हार में हमेशा एससी वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते आ रहे हैं।

राजनीतिक मिजाज

  • सीमापुरी विधानसभा सीट (रिजर्व) के राजनीतिक मिजाज की बात करें तो 1993 में हुए पहले चुनाव में यहां से बीजेपी जीती थी। इसके बाद बीजेपी को यहां लगातार हार का सामना करना पड़ा। बाकी छह चुनावों में तीन बार यह सीट कांग्रेस पार्टी के पास रही और तीन बार ही यहां से आम आदमी पार्टी चुनाव जीती।
  • 2020 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे राजेंद्र पाल गौतम ने पार्टी छोड़ दी। एक बार फिर विधायक बनने का सपना लेकर कांग्रेस पार्टी से तीन बार विधायक रहे वीर सिंह धिंगान ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। अब वह इस सीट से झाडू के चुनाव चिह्न पर मैदान में है।
  • वहीं बीजेपी उम्मीदवार कुमारी रिंकू साल 1998 में नंद नगरी से कांग्रेस पार्टी के विधायक रहे रूपचंद की बेटी हैं। इससे पहले वह कांग्रेस के टिकट पर नंद नगरी से निगम पार्षद का चुनाव जीतकर ईस्ट एमसीडी में कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष बनी थी। इसके बाद वह कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गईं। राजेश लिलोठिया पेटल नगर विधानसभा से 2008 में कांग्रेस के विधायक रहे हैं।

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