क्रॉस करते हैं रेड लाइट तो संभल जाइए! नियम तोड़ने वालों पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ले रही सख्त ऐक्शन

नई दिल्ली। दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक सिग्नल पर रेड लाइट क्रॉस करने की जल्दबाजी लाखों लोगों को भारी पड़ रही है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राजधानी के प्रमुख चौराहों और क्रॉसिंग्स पर स्टॉप लाइन से आगे जाकर गाड़ी रोकने वाले लोगों के खिलाफ ऐक्शन तेज कर दिया है। एक तरफ चौराहों पर लगे कैमरों की मदद से ऐसे लोगों के खिलाफ जमकर कार्रवाई की जा रही है। वहीं जिन जगहों पर कैमरे नहीं लगे हैं, वहां चौराहों पर ट्रैफिक स्टाफ की तैनाती करके मैनुअल तरीके से भी एक्शन लिया जा रहा है। यही वजह है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल की पहली तिमाही में स्टॉप लाइन वायलेशन के मामले में 20 प्रतिशत ज्यादा चालान कटे हैं।
ट्रैफिक पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले साल 1 जनवरी से 31 मार्च तक स्टॉप लाइन वायलेशन के 1,05,317 चालान कटे थे, वहीं इस साल की पहली तिमाही में 31 मार्च तक स्टॉप लाइन नियम का उल्लंघन करने वाले 1,26,984 लोगों के चालान काटे जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि रेड लाइट क्रॉस करने की जल्दबाजी में स्टॉप लाइन नियमों को तोड़ने वालों के कारण न केवल दूसरी तरफ से गुजर रहा ट्रैफिक डिस्टर्ब होता है, बल्कि पैदल रोड क्रॉस कर रहे लोगों को भी दिक्कत होती है और कई बार उनकी सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है। कई लोग तो जान बूझकर स्टॉप लाइन नियम का पालन नहीं करते हैं और आगे जाकर गाड़ी रोकते हैं। इनमें बड़ी संख्या टूवीलर की भी होती है। ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने के मकसद से स्टॉप लाइन नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है।
स्टॉप लाइन वायलेशन के सबसे अधिक मामले अभी तक डिफेंस कॉलोनी ट्रैफिक सर्कल में सामने आए हैं, जहां पिछले तीन महीनों में 24,716 लोगों के चालान कटे हैं। वहीं दूसरे नंबर पर मयूर विहार सर्कल है, जहां 13,285 लोगों के चालान कटे, जबकि तीसरे नंबर पर सफदरजंग एनक्लेव सर्कल है, जहां 12,552 लोगों के चालान कटे। टॉप-10 सर्कलों में इन तीन सर्कलों के अलावा लाजपत नगर, द्वारका, तिलक नगर, पंजाबी बाग, मॉडल टाउन, मधु विहार और सिविल लाइंस सर्कल भी शामिल हैं, जिनमें स्टॉप लाइन वायलेशन के 4 हजार से लेकर 8 हजार तक चालान कटे हैं। ट्रैफिक पुलिस ने रोड ओनिंग एजेंसियों से भी कहा है कि सभी प्रमुख चौराहों पर स्टॉप लाइन और जेब्रा कॉसिंग की स्पष्ट रूप से मार्किंग की जाए, ताकि चालान कटने पर लोग ये बहाना न बना सकें कि उन्हें लाइन दिखी ही नहीं।

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