बारामूला में दिखी दुनिया की सबसे बड़ी सांप मारकर खाने वाली दुर्लभ मारखोर बकरी
पाकिस्तान से नियंत्रण रेखा पार कर बारामूला में आ गई, पाकिस्तान का है राष्ट्रीय पशु

श्रीनगर/एजेंसी। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में शनिवार को सर्पिल आकार के सींगों वाला जंगली बकरी मारखोर देखी गई। बारामूला जिले की उरी तहसील के बोनियार क्षेत्र के नूरखा में ग्रामीणों की नजर इस जंगली बकरी पर पड़ी। यह झरने के पास खड़ी थी। वन्यजीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने इस दुर्लभ जानवर को पकड़ने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। मारखोर (कैप्रा फाल्कोनेरी) एक बड़ी जंगली बकरी की प्रजाति है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी बकरी कहा जाता है।
मारखोर दक्षिण और मध्य एशिया मुख्य रूप से पाकिस्तान, काराकोरम पर्वत श्रृंखला, अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों और हिमालय में पाई जाती है। मारखोर को 2015 से आईयूसीएन की रेड लिस्ट में सूचीबद्ध किया गया है। यह प्रजाति खतरे के निकट है। मारखोर भारत में नहीं पाई जाती है। माना जा रहा है कि यह पाकिस्तान से नियंत्रण रेखा पार कर बारामूला में आ गई है। यह पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु है।
‘मारखोर’ शब्द पश्तो और शास्त्रीय फारसी भाषा से आया है जिसका अर्थ है ‘सांप खाने वाला।’ कहा जाता है कि मारखोर सांपों को मारकर खा जाती है। इसके बाद जुगाली करते समय उसके मुंह से झाग जैसा पदार्थ निकलता है। मारखोर के मुंह से निकलने वाला यह झाग जमीन पर गिरकर सूख जाता है। स्थानीय लोग इस झाग से वे सांप के काटने पर जहर उतारते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 मई को अंतर्राष्ट्रीय मारखोर दिवस घोषित किया है। यह 2,000 से 11,800 फीट की ऊंचाई के बीच पाए जा सकते हैं। इनका प्रजनन काल शीतकाल में होता है। उनका गर्भकाल 135-170 दिनों तक रहता है। ये एक बार में एक या दो बच्चे पैदा करते हैं। मारखोर झुंड में रहते हैं। जिनमें वयस्क मादाएं और उनके बच्चे शामिल होते हैं। वयस्क नर ज्यादातर अकेले रहते हैं।




