भारत मंडपम से 5 करोड़ साल पुराना जीवाश्म ले गया चोर, नोएडा में मिला
A thief stole 5 crore years old fossil from Bharat Mandapam, found in Noida

- भूविज्ञानियों को जैसलमेर में मिला था जीवाश्म, जहां कभी हुआ करता था समुद्र।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के स्टॉल से चोरी हुआ था गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म।
- गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म को ऊंची कीमत में बेचने के इरादे से आरोपी ने की थी चोरी।
नई दिल्ली/एजेंसी। भारत मंडपम में लगे भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के स्टॉल से पांच करोड़ साल पुराना गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म चोरी करने के आरोप में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला थाना पुलिस ने आरोपी मनोज कुमार मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म को ऊंची कीमत में बेचने के इरादे से आरोपित ने चोरी की थी। उसके घर से गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म भी बरामद कर लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला के डीसीपी सुमित कुमार झा का कहना है कि 21 नवंबर को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के कर्मचारियों ने हॉल नंबर चार में स्थित खनन मंत्रालय के मंडप से उनके स्टॉल से पांच करोड़ साल पुराना गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म चोरी होने की शिकायत दी थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत ई-एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।
एसीपी रतन लाल व एसएचओ राजेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच के दौरान घटनास्थल और आसपास के स्टॉल में लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। तकनीकी जांच के दौरान आरोपी की पहचान कर ली गई। इसके बाद करीब दो-तीन घंटे तक मेले में उसके मूवमेंट को ट्रैक किया गया। एक दुकान में उसे कुछ सामान खरीदते देखा गया, जिसका पेमेंट उसने मोबाइल से किया था। इसके बाद यूपीआई से बैंक खाता नंबर का पता कर उसके घर का पता लगाया, फिर नोएडा के सेक्टर-22 से मनोज कुमार मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया।

सख्ती से पूछताछ करने पर उसने चोरी करने की बात कुबूल कर ली और पुलिस को गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म सौंप दिया। उसके पास से 21 नवंबर का वह टिकट भी मिल गया, जिसका इस्तेमाल उसने मेले में प्रवेश के लिए किया था। मनोज कुमार मिश्रा, नोएडा के क्राउन प्लाजा होटल में रिसिविंग मैनेजर के पद पर नौकरी करता है। उसने होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रखा है। जिससे उसे विभिन्न कला रूपों में गहरी रुचि है। गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म उसने ऊंची कीमत पर बेचने के इरादे से चोरी की थी। उसके खिलाफ पहले का कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं पाया गया। चोरी हुए जीवाश्म का वजन एक किलोग्राम है और लंबाई 14 सेमी, चौड़ाई 10 सेमी व ऊंचाई 12 सेमी है।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के निदेशक (भू) डॉ. प्रवीर पंकज ने बताया कि गैस्ट्रोपॉड जीवाश्व घोंघा प्रजाति के मोलस्का परिवार का है। इसमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती। इससे जीएसआई यह पता करती है कि उस स्थान का तब के समय में वातावरण कैसा रहा होगा। जीएसआई को यह जैसलमेर से मिला है। यह समुद्र के किनारे पाया जाता है। यह नमक वाले पानी में वहां पाया जाता है, जहां पानी कम होता है। उन्होंने कहा कि जैसलमेर में भी कभी समुद्र हुआ करता था। वहां किनारा रहा होगा। उन्होंने कहा कि अब तक इसके कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं और न ही कभी इसे खरीदने या बेचने के बारे में सोचा गया।
यह समझ से परे है कि चोरी करने वाले ने इसे क्या सोच कर चुराया और इसे कोई क्यों खरीदेगा। उन्होंने कहा कि जीवाश्वम को विश्व व्यापार मेले में जीएसआई के स्टॉल पर रखा जाता है, ताकि लोग इसे देखने के साथ इसके बारे में जान सकें। बता दें कि भूवैज्ञानिकों ने जैसलमेर सहित राजस्थान के कुछ हिस्सों में जीवाश्मों की खोज की थी, जो संकेत देते हैं कि यह पूरा क्षेत्र कभी समुद्र में डूबा हुआ था। अनुमानित समयरेखा से पता चलता है कि यह भारत-यूरेशिया टकराव से पांच करोड़ वर्ष पहले की बात है।




