ओशो के पुणे आश्रम में होती थी सेक्स थेरेपी? मौत के 34 साल बाद चर्चा में आचार्य रजनीश, जानें पूरी कहानी

Was sex therapy done in Osho's Pune Ashram? Acharya Rajneesh in news 34 years after his death, know the whole story

यूके की 54 वर्षीय महिला ने भारतीय धर्मगुरु रजनीश के कुख्यात सेक्स पंथ में पले-बढ़े होने का अपना दुखद अनुभव साझा किया है। प्रेम सरगम ने एक इंटरव्यू में तीन संन्यासियों के ग्रुप के छह साल की उम्र से उसके साथ किए गए यौन शोषण के बारे में विस्तार से बताया।प्रेम सरगम के पिता ब्रिटेन से अपना घर छोड़कर रजनीश ओशो के आश्रम पुणे में आ गए। उन्होंने प्रेम सरगम और उनकी मां को पीछे छोड़ते हुए एक संन्यासी बनने का फैसला लिया। प्रेम सरगम भी इस पंथ में शामिल हो गईं। उसका दावा है कि 6 साल की उम्र से उसके साथ आश्रम में यौन शोषण किया गया। 6 साल बाद जब वह 12 साल की हुई तो उसका रेप हुआ। उसे 16 साल की उम्र में यह सब समझ आया कि उसके साथ क्या हो रहा है। प्रेम सरगम के जीवन पर एक फिल्म रिलीज होने जा रहा है, जिसके बाद ओशो एक बार फिर चर्चा में हैं।
मध्य प्रदेश में हुआ था जन्म
ओशो को दुनिया से गए लगभग 34 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी उनकी चर्चा है। ओशो की किताबें खूब बिकती हैं, उनके वीडियो और ऑडियो खूब सुनते हैं। भारत से लेकर विदेशों तक उनके सैकड़ों फॉलोअवर्स हैं। ओशो का जन्म 11 दिसंबर 1931 को मध्य प्रदेश में हुआ था। ओशो का असली नाम चंद्रमोहन जैन था। 1951 में ग्रैजुएशन करने के बाद ओशो ने जबलपुर के हितकारिणी कॉलेज में एडमिशन लिया। इस दौरान उनकी यहां के दर्शनशास्त्र के एक प्रफेसर से ठन गई। कहा जाता है कि प्रफेसर ओशो के सवालों से इतना परेशान हुए कि उन्होंने प्रिंसिपल से कहा कि अब कॉलेज में ओशो रहेंगे या वह। प्रिंसिपल ने ओशो से कॉलेज छोड़ने को कहा। उन्हें बाद में बड़ी मुश्किल से डीएन जैन कॉलेज में प्रवेश मिला।
रजनीश 1957 में रायपुर की संस्कृत यूनिवर्सिटी में प्रवक्ता बन गए। 1960 में वह जबलपुर विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर बने। इसी दौरान उन्होंने आध्यात्मिक गुरू बनने की ओर रुख किया। वह भारत भ्रमण पर निकले, राजनीति, धर्म और सेक्स पर विवादास्पद व्याखयान देने लगे। 1969 में उन्होंने मुंबई में अपना एक दफ्तर बनाया। यहां मां योग लक्ष्मी नाम की युवती उनकी असिस्टेंट बनी। हालांकि एक साल बाद उन्होंने योग लक्ष्मी को हटाकर एक विदेशी महिला क्रिस्टीना वुल्फ को अपना असिस्टेंट बनाया। क्रिस्टीना को उन्होंने मां योगा विवेक नाम दिया।
रजनीश ने शुरू से ही धार्मिक धारणाओं और कर्मकांडों के खिलाफ थे। वह पूर्वी दर्शन और फ्रॉयड के मनोविश्लेषण को सामने लाए और सेक्सुअल लिबरेशन की बात की। ओशो अपना भाषण हिंदी और अंग्रेजी में देते थे। वह विवादास्पद विषयों पर अपनी राय रखने के लिए जाने जाते थे। कई बार लोकसभा में ओशो पर बैन लगाने की चर्चा तक हुई। ओशो को मुंबई की बारिश से एलर्जी हो गई। उनके विदेशी अनुयाइयों को भी समस्या होने लगी। उसके बाद तय हुआ कि मुंबई के आसपास महाराष्ट्र में ही कोई दूसरी जगह ढूंढी जाए। उसके बाद पुणे के कोरेगांव में जमीन लेकर ओशो का आश्रम बनाया गया। यहां ओशो ने सिर्फ अंग्रेजी में भाषण देना शुरू कर दिया, आश्रम में आने की हैवी फीस लगा दी गई। इससे उनके भारतीय अनुयायी कटने लगे।
ओशो के आश्रम में तरह-तरह की थेरेपी भी दी जाने लगीं। सबसे ज्यादा लोग सेक्स थेरेपी को पसंद करने लगे। भारतीय लोगों को यहां मिलने वाली थेरेपी नहीं दी जाती थीं। ओशो ने ‘संभोग से समाधि’किताब लिखी। इस किताब को लेकर वह साधु-संतों के निशाने पर आ गए। वहीं दूसरी ओर पुणे के रजनीश के आश्रम का विस्तार होने लगा। अब यह 25 हजार वर्ग मीटर पर फैल गया था। यहां एक मेडिकल सेंटर बनाया गया। इसमें दुनिया भर से लोग आने लगे। यहां की संन्यासिनों को गर्भवती होने से रोका जाता था। उन्हें गर्भ निरोधक दवाएं दी जाती थीं। अगर कोई गर्भवती होती थी तो उसका अबॉर्शन यहां अस्पताल में किया जाता था। ओशो यौन रिपरेशन की बात करते थे इसलिए संन्यासी यहां खुलकर सेक्स करते थे। कहा जाता है कि आश्रम में संक्रामक यौन रोग बढ़ गए। संन्यासियां एक दिन में कई बार और अलग-अलग लोगों के साथ सेक्स करती थीं।
ओशो को डायबटीज हो गया, उन्होंने भाषण देना बंद कर दिया। ओशो का अब पुणे आश्रम से जी भर गया था। उन्होंने अमेरिका के ओरेगन में 31 मई 1981 को एक आश्रम खोला। ओशो ने 93 रॉल्स रॉइस कारें खरीदीं। आलीशान जीवन बीतने लगा लेकिन अचानक उनके जीवन में डाउनफॉल शुरू हुआ। उनके ऊपर प्रवासी नियमों का उल्लंघन करने के लिए केस हुआ। वह 17 दिन अमेरिका की जेल में रहे। उनके ऊपर अमेरिका छोड़ने का दबाव था लेकिन कोई दूसरा देश उन्हें अपने यहां शरण देने को राजी नहीं था। आखिरकार ओशो भारत वापस आए। 19 जनवरी 1990 को ओशो का निधन हो गया। हालांकि ओशो की मौत पर भी विवाद हुआ। किसी ने उनकी हत्या किए जाने की बात कही तो किसी ने यौन संबंधी बीमारी से मौत की बात कही।

लेखक -शशि मिश्रा

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