दिल्ली पुलिस पर फिर लगा दाग,दिल्ली पुलिस ने जेल भेजने के नाम पर वसूले 19 लाख रुपये

नई दिल्ली। ऑनलाइन ई-कॉमर्स और मार्केटिंग बिजनेस करने वाले तीन लड़कों से वेस्ट जिला साइबर थाने में मारपीट की गई। ओटीपी फ्रॉड के तहत जेल भेजने का डर दिखाया और 19.50 लाख रुपये वसूल लिए। मामले की जांच हुई, जिसके बाद विजिलेंस डिपार्टमेंट ने सब इंस्पेक्टर बृजेश रेड़ू, हेड कॉन्स्टेबल सतीश कुमार और अनिल यादव के खिलाफ जबरन वसूली (आईपीसी की धारा 384) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 7 के तहत केस दर्ज कर लिया है।
19 साल के लड़के का दावा है कि वो ईस्ट दिल्ली में रहता है। एक नामी यूनिवर्सिटी से बीबीए कर रहा है। पार्ट टाइम ऑनलाइन ई-कॉमर्स और मार्केटिंग बिजनेस भी करता है। विजिलेंस जांच में पीड़ित ने बताया कि वो 10 मार्च 2023 को अपने ऑफिस में था। तिलक नगर थाने से कॉल आया कि एक डिलिवरी बॉय को पकड़ा है। पीड़ित, उसका भाई और दोस्त थाने पहुंचे। पता चला कि एक कस्टमर के साथ ओटीपी फ्रॉड हुआ है। दावा था कि कूरियर कंपनी के कस्टमर नंबर पर कॉल करने पर 27 हजार का फ्रॉड हुआ है। केस को हरि नगर स्थित वेस्ट जिला साइबर थाने को ट्रांसफर किया गया। आरोप है कि वहां एसआई बृजेश रेड़ू समेत बाकी पुलिसवालों ने गाली-गलौज और मारपीट की। सभी को ओटीपी फ्रॉड में 10 साल जेल भेजने का डर दिखाया। तीनों पुलिसवालों के सामने रोने लगे। आरोप है कि एसआई बृजेश ने 25 लाख की डिमांड की। दहशत की वजह से पीड़ित राजी हो गए। थोड़ी देर बाद 40 लाख की मांग की गई।
आरोप है कि पीड़ित के भाई के साथ पुलिसवाले उसके घर पैसे लेने गए। वहां से साढ़े सात लाख रुपये लाए। तीनों को थाने में रखा गया। अगले दिन बाकी रकम लाने भेजा। इस दौरान पीड़ित के पिता ने ईस्ट दिल्ली के मंडावली थाने में पीड़ित और दूसरे बेटे की मिसिंग कंप्लेंट दी। पुलिसवालों ने पीड़ित के पिता से बात कर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। अगले दिन उन्होंने पुलिसवालों को बाकी रकम दी। इससे कुल 19.50 लाख रुपये दिए गए। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। लेकिन एसआई पैसे के लिए फिर कॉल करने लगा।
आरोप है कि पीड़ित के पिता ने कॉल पिक किया, जिन्होंने मीडिया और आला अफसरों के पास जाने की बात कही। एसआई ने फोन काट दिया। इसके बाद तीनों के खिलाफ साइबर थाने में कथित झूठा केस दर्ज कर दिया। पीड़ितों का दावा है कि एसआई बृजेश को केस सौंपते हुए इंस्पेक्टर ने बढ़िया केस होने की बात कही थी, जो इस केस में शुरू से इन्वॉल्व है। पीड़ितों ने डीसीपी वेस्ट से मामले की कंप्लेंट की। सीसीटीवी फुटेज समेत कई सबूत पेश किए गए। विजिलेंस जांच हुई, जिसके बाद 10 जुलाई 2024 को तीनों पुलिसवालों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। एफआईआर में इंस्पेक्टर को नामजद नहीं किया गया है।

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